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भारत और श्रीलंका: सांस्कृतिक संबंधों की गहरी जड़ें, हिंदी बोलता है यह द्वीप राष्ट्र

By Dec 2, 2025

भारत और श्रीलंका के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक संबंध केवल ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि आज भी अत्यंत घनिष्ठ हैं। यह बात हाल ही में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित एक संगोष्ठी के दौरान सामने आई, जहाँ श्रीलंका के हिंदी संस्थान की निदेशक अतिला कोतलावत ने दोनों देशों के बीच की समानताएं बताईं। उन्होंने कहा कि भारत श्रीलंका के लिए हमेशा से एक गुरु देश रहा है और श्रीलंकावासियों का भारत के प्रति एक विशेष अपनत्व है।

यह अपनत्व केवल बातों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवनशैली में भी झलकता है। कई श्रीलंकाई न केवल हिंदी बोलते हैं, बल्कि भारतीय हिंदी गीतों को भी बड़े चाव से गुनगुनाते हैं। भारतीय भोजन की लोकप्रियता का आलम यह है कि यह वहां के खान-पान का अहम हिस्सा बन गया है। भारतीय महिलाओं की तरह श्रीलंका की महिलाएं भी अक्सर साड़ी में सजी-धजी नजर आती हैं और मेहंदी लगाने का चलन भी काफी लोकप्रिय है।

यह सांस्कृतिक जुड़ाव बौद्ध धर्म के कारण भी और गहरा होता है, क्योंकि बौद्ध धर्म के कई महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल भारत में स्थित हैं, जहाँ श्रीलंका से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। इसके अलावा, रामायण काल से जुड़े 18 महत्वपूर्ण स्थान श्रीलंका में मौजूद हैं, जो दोनों देशों के बीच एक प्राचीन और अटूट संबंध की गवाही देते हैं। यह ऐतिहासिक संबंध अनंत काल तक चलने की उम्मीद है।

संगोष्ठी में सुहृदभूमि हिंदी निकेतन संस्थान की निदेशक के. कंचनमाला ने रेडियो सीलोन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रेडियो सीलोन भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक संबंधों को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य करता रहा है। आज भी वहां 1930 से 1955 के बीच के भारतीय गाने बजाए जाते हैं। रेडियो सीलोन के प्रभाव से ही श्रीलंका में हिंदी प्रेमियों की संख्या में वृद्धि हुई और आज भी भारतीय कार्यक्रमों का विशेष प्रसारण किया जाता है। यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक माध्यम सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने कहा कि यदि भारत-श्रीलंका संबंध एक नदी हैं, तो रेडियो सीलोन उस नदी का सबसे सुंदर तट है।

इस गोष्ठी में विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ के निदेशक प्रो. श्रीधर ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डा. रमा रश्मि ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डा. वर्षारानी ने दिया। इस अवसर पर डा. केशव शर्मा, पल्लवी आर्य, डा. राजकुमार, डा. अमित कुमार सिंह, डा. प्रदीप वर्मा, डा. आदित्य प्रकाश, डा. मोहिनी दयाल, डा. शालिनी श्रीवास्तव सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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