यूपी के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य और उन्नत खेती से हुए मालामाल
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की कृषि-अनुकूल नीतियों ने प्रदेश के किसानों के जीवन में खुशहाली और समृद्धि के नए अध्याय लिखे हैं। वर्ष 2017 के बाद से, प्रदेश सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को प्रभावी ढंग से लागू करने और उन्नत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई दे रहे हैं।
धान खरीद सत्र 2025-26 में, प्रदेश के 5,73,633 किसानों ने पंजीकरण कराया, जो सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 4227 क्रय केंद्रों के माध्यम से अब तक 9.02 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद की जा चुकी है। यह खरीद न केवल किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में सहायक है, बल्कि बिचौलियों की भूमिका को भी कम करती है।
सरकार द्वारा एमएसपी में लगातार सुधार और किसानों को उनकी उपज का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के प्रयासों ने कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक परिणाम दिए हैं। इससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है और राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी और मजबूत हुई है। गेहूं, चावल और श्रीअन्न (मिलेट्स) जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2001-02 से 2016-17 तक की अवधि में जहां अधिकांश प्रमुख फसलों की उत्पादकता में औसतन 8.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, वहीं 2016-17 से 2024-25 तक की अवधि में यह वृद्धि औसतन 42.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह वृद्धि तकनीकी उन्नति, बेहतर कृषि प्रबंधन और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है।
प्रदेश सरकार ने किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने, कृषि यंत्रों के वितरण और श्रीअन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम भी चलाए हैं। मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम के तहत मिनीकिट वितरण और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कृषि यंत्रों की उपलब्धता ने किसानों को आधुनिक खेती के लिए सशक्त बनाया है। इन समग्र प्रयासों से उत्तर प्रदेश के किसान न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध हुए हैं, बल्कि प्रदेश की कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, जिससे वे ‘खुशहाल किसान’ और ‘समृद्ध प्रदेश’ की ओर अग्रसर हैं।
