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औरंगाबाद में साइबर अपराध का जाल फैला, 250 मामले दर्ज, पुलिस परेशान

By Nov 29, 2025

औरंगाबाद जिले में साइबर अपराध एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। आए दिन धोखाधड़ी की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिसमें नागरिक लाखों रुपये गंवा रहे हैं। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अब तक साइबर थाने में 105 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि अन्य थानों में भी 150 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

स्थिति यह है कि एक मामला सुलझने से पहले ही पुलिस के सामने दूसरा मामला आ खड़ा होता है। साइबर धोखाधड़ी का शिकार सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, बल्कि अधिकारी, शिक्षक और पुलिसकर्मी भी हो रहे हैं। ठगी की राशि भी छोटी-मोटी नहीं, बल्कि कई मामलों में दस-दस लाख रुपये तक खातों से उड़ा दिए गए हैं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस गति से साइबर अपराध बढ़ रहा है, उसे रोकना एक बड़ी चुनौती है। अगर इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो लोगों के लिए अपने बैंक खातों में पैसे सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि पुलिस अभी तक साइबर ठगों के नेटवर्क को तोड़ने और उन्हें गिरफ्तार करने में सफल नहीं हो पाई है।

शहर के न्यू एरिया निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि एटीएम कार्ड बदलकर पैसे निकालने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि शहर के अधिकतर एटीएम बिना गार्ड के चल रहे हैं, जहां साइबर ठग पहले से तकनीकी छेड़छाड़ कर मौजूद रहते हैं। जब कोई ग्राहक एटीएम में कार्ड डालता है, तो मशीन उसे जाम कर देती है। इसी का फायदा उठाकर ठग मदद के बहाने ग्राहक का कार्ड बदल लेते हैं और खाते से सारी राशि निकाल लेते हैं। कुछ ठग एटीएम के अंदर नकली हेल्पलाइन नंबर चिपकाकर भी लोगों को जाल में फंसाते हैं।

जिले में हाल ही में हुई कुछ गंभीर घटनाओं में, देव के कटैया गांव निवासी अभिषेक कुमार से वर्क फ्रॉम होम के नाम पर 10 लाख रुपये ठगे गए। हसपुरा के पीरु गांव निवासी एक शिक्षक से जिला निर्वाचन कार्यालय से फोन करने का बहाना बनाकर पांच लाख 34 हजार रुपये ठग लिए गए। 17 अक्टूबर को गायत्री नगर निवासी विकास कुमार से 37 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई, जबकि श्रीकृष्ण नगर के सौरभ कुमार से आठ लाख 26 हजार रुपये की ठगी की गई।

साइबर थाना पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ठगी की घटना होते ही तुरंत 1930 नंबर पर संपर्क करें। समय रहते शिकायत मिलने पर ठगी गई राशि को होल्ड कराया जा सकता है और पीड़ित के खाते में वापस दिलाने का प्रयास किया जाता है।

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