देहरादून: सैटेलाइट सर्वे से खुली सरकारी जमीनों की पोल, अवैध कब्जे हटाएगी निगम
देहरादून नगर निगम क्षेत्र में सरकारी जमीनों की अब तक की सबसे सटीक और विस्तृत तस्वीर सामने आई है। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) द्वारा किए गए एक गोपनीय सैटेलाइट सर्वे ने नदी क्षेत्रों, ढांग, खाले से लेकर बंजर और जंगल-झाड़ी श्रेणी की भूमि तक का स्पष्ट दायरा चिह्नित किया है। इस महत्वपूर्ण सर्वे में ऐसी कई सरकारी जमीनें पहचानी गई हैं जिन पर या तो अवैध कब्जे की आशंका है या जिनका वर्षों से कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
नगर निगम ने यूसैक के साथ अनुबंध के तहत यह सर्वे अपने सभी 100 वार्डों और सीमा विस्तार में शामिल 72 गांवों में कराया। सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट अब नगर निगम के भूमि अनुभाग को सौंप दी गई है। इसके बाद, चिह्नित की गई जमीनों का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन (ग्राउंड वेरिफिकेशन) शुरू किया जाएगा। इसी प्रक्रिया के आधार पर देहरादून का पहला पारदर्शी लैंड बैंक तैयार किया जाएगा।
यूसैक ने यह सर्वे कुछ महीने पहले अत्यंत गोपनीय तरीके से पूरा किया था। इस सर्वे में नदी श्रेणी की भूमि, पहाड़ी ढलान (ढांग), खाले क्षेत्र, बंजर और जंगल-जाड़ी जमीनें, साथ ही खाली और कब्जा-मुक्त भूमियों को कैटेगरी-वाइज रिकॉर्ड किया गया है। यूसैक की रिपोर्ट में प्रत्येक भू-भाग का सटीक लोकेशन, जमीन का प्रकार और उसके संभावित उपयोग तक का विस्तृत विवरण शामिल है। अब नगर निगम की टीम इन जमीनों की भौतिक जांच कर अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी।
नगर निगम देहरादून पहली बार एक आधिकारिक लैंड बैंक तैयार कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य शहर में चल रही सरकारी योजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करना और भविष्य में विकास परियोजनाओं के लिए जमीन की समस्या को समाप्त करना है। इस पहल से प्रस्तावित वेंडिंग जोन, पार्क निर्माण और अन्य विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने में तेजी आएगी। साथ ही, अवैध कब्जों और निर्माणों पर कार्रवाई करना भी आसान होगा। अभी तक नगर निगम के पास कई जमीनों का सही रिकॉर्ड न होने के कारण वर्षों से कई महत्वपूर्ण योजनाएं अटकी हुई थीं, जिनके अब गति पकड़ने की उम्मीद है।
