लेखपालों के विरोध को कांग्रेस का समर्थन, मांगी कठोर कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) के भारी दबाव के चलते एक लेखपाल द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना ने प्रदेशव्यापी आक्रोश को जन्म दिया है। शादी से ठीक एक दिन पहले लेखपाल सुधीर माहौर की आत्महत्या से आहत लेखपाल संघ पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहा है। इस विरोध को और मजबूती देने के उद्देश्य से, शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी ने भी लेखपालों के आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया।
जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर के नेतृत्व में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मथुरा तहसील पर धरने पर बैठे लेखपालों के समर्थन में पहुंचे। इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि फतेहपुर में लेखपाल सुधीर माहौर को एसआईआर के दबाव में अपनी जान देने के लिए विवश होना पड़ा, जो शासन-प्रशासन की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जिला कांग्रेस कमेटी लेखपाल संघ द्वारा किए जा रहे इस धरने का पूर्ण समर्थन करती है और सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करती है।
कांग्रेस जिला कमेटी ने इस मामले में शासन-प्रशासन से मांग की है कि जिस भी अधिकारी के दबाव के कारण लेखपाल सुधीर माहौर को अपनी जान गंवानी पड़ी, उसके खिलाफ तत्काल कठोरतम कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, मृतक लेखपाल के पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए, ताकि उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके। कांग्रेस ने यह भी अपील की कि लेखपालों और बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को एसआईआर कार्य के लिए अनावश्यक रूप से मानसिक उत्पीड़न का शिकार न बनाया जाए।
इस समर्थन प्रदर्शन में पूर्व महानगर अध्यक्ष विक्रम बाल्मीकि, आदित्य तिवारी एडवोकेट, डा. सीएस आनन्द, अप्रतिम सक्सेना, आवाज मोहम्मद, अश्वनी शुक्ला, अभय प्रताप सिंह, रमेश कश्यप, आशीष अग्रवाल, रवि वाल्मीकि, जिलानी कादरी, करण निषाद, अशोक निषाद, प्रेम शंकर शर्मा, शैलेंद्र चौधरी, दीपक दीक्षित, अरनव चौधरी सहित कई अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। यह घटना सरकारी कर्मचारियों पर काम के बढ़ते दबाव और उसके मानवीय पहलुओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
