जमालपुर-भागलपुर रेलखंड पर दौड़ेगीं तीन ट्रेनें, 11.55 करोड़ से बिछेगी तीसरी पटरी
जमालपुर-भागलपुर रेलखंड पर यात्रियों और माल ढुलाई की सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रेलवे ने इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर तीसरी रेल पटरी बिछाने की कवायद शुरू कर दी है, जिससे भविष्य में एक साथ तीन ट्रेनों का परिचालन संभव हो सकेगा। इस परियोजना के लिए लगभग 11.55 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है और 53 किलोमीटर लंबी इस नई रेल लाइन के निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, नई रेल पटरी बिछाने का काम मार्च से शुरू होने की उम्मीद है। इस कार्य के लिए भूमि अधिग्रहण के तहत आने वाले रैयतों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा। राइट्स लिमिटेड की एक विशेषज्ञ टीम इस परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर रही है। इस तीसरी रेल लाइन के बिछ जाने से जमालपुर-भागलपुर रेलखंड पर मालगाड़ियों का परिचालन अधिक सुगम और तेज होगा। वर्तमान में, लाइन की कमी के कारण कई बार यात्री ट्रेनों को अनावश्यक रूप से रोकना पड़ता है, जिससे परिचालन में विलंब होता है। तीसरी लाइन के चालू होने से यात्री ट्रेनों को भी समय पर चलाने में मदद मिलेगी, जिससे यात्रियों की सुविधा में वृद्धि होगी।
रेलवे ने जमालपुर से भागलपुर रेल सेक्शन के दक्षिणी दिशा में लगभग 83 फीट जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जनवरी 2026 तक जमीन अधिग्रहण से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद, प्रभावित रैयतों को जमीन संबंधी दस्तावेज जमा करने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा और मार्च तक उन्हें मुआवजे की राशि उनके खातों में भेज दी जाएगी। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद जल्द ही निर्माण कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।
पूर्व रेलवे, मालदा मंडल के उप मुख्य अभियंता (निर्माण) हेमंत कुमार ने बताया कि तीसरी रेल लाइन को चालू होने में जमीन अधिग्रहण, फाटक बंद करने और आरओबी निर्माण सहित विभिन्न कार्यों के चलते दो से तीन वर्ष का समय लग सकता है। इस दौरान, कई रेलवे क्रासिंग और संपर्क फाटक बंद किए जाएंगे, और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के तौर पर आरओवी (रोड ओवर ब्रिज) और एलएचएस (Limited Height Subway) का निर्माण किया जाएगा। रतनपुर जैसे स्थानों पर सुरंगों और पुलों के नवीनीकरण का प्रस्ताव भी शामिल है। यह परियोजना इस रेलखंड पर ट्रेनों की गति बढ़ाने और समग्र रेल अवसंरचना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
