बिहार में विधानसभा के बाद अब पंचायत की जंग की तैयारी, किशनगंज में चर्चा तेज
बिहार में विधानसभा चुनावों का शोर थमते ही अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की बारी आ गई है। राज्य भर में, विशेषकर किशनगंज जिले के चौराहों और नुक्कड़ों पर, अगले साल होने वाले इन महत्वपूर्ण चुनावों को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। संभावित उम्मीदवार अपनी दावेदारी मजबूत करने और जनता से जुड़ने के लिए अभी से सक्रिय हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, पंचायती राज विभाग भी अगले वर्ष होने वाले पंचायत चुनावों के लिए अपनी प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर चुका है। हालांकि, चुनावों की कोई आधिकारिक अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है, लेकिन चुनावी माहौल बनने लगा है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव, जिनमें मुखिया, सरपंच, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और पंच शामिल हैं, ग्रामीण विकास की रीढ़ माने जाते हैं। ये जनप्रतिनिधि सीधे तौर पर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को प्रभावित करते हैं, इसलिए इन चुनावों का महत्व काफी अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के अंत तक संभावित इन चुनावों में आरक्षण रोस्टर में बदलाव की प्रबल संभावना है। बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 के अनुसार, हर 10 साल में आरक्षण रोस्टर की समीक्षा की जाती है। इस बार महिला, अति पिछड़ा, अनुसूचित जाति और सामान्य श्रेणी के आरक्षण में फेरबदल हो सकता है। इसी संभावित बदलाव के मद्देनजर, कई संभावित प्रत्याशी पिछले आरक्षण के आधार पर अपनी रणनीति बना रहे हैं और क्षेत्र में जनसंपर्क बढ़ा रहे हैं।
संभावित प्रत्याशियों की बढ़ी हुई सक्रियता से यह उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी पंचायत चुनाव काफी कड़े और दिलचस्प होंगे। कुछ क्षेत्रों में, एक ही परिवार के सदस्य विभिन्न पदों के लिए चुनाव लड़ते हुए देखे जा सकते हैं, जिससे मुकाबला और भी रोमांचक होने की संभावना है। लोगों का कहना है कि प्रत्याशियों द्वारा अभी से सामाजिक गतिविधियों में रुचि लेना और क्षेत्र में भ्रमण करना, उनके इरादों को स्पष्ट करता है। यह चुनावी गहमागहमी बिहार के ग्रामीण राजनीतिक परिदृश्य में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दे रही है।
