सफदरजंग अस्पताल में संविधान का सम्मान: 13 प्रवेश द्वार अब महापुरुषों के नाम
नई दिल्ली। सफदरजंग अस्पताल ने देश के संविधान के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल की है। अस्पताल के 13 मुख्य प्रवेश द्वारों का नामकरण भारत के उन महान व्यक्तित्वों के नाम पर किया गया है जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम, संविधान निर्माण और राष्ट्र-निर्माण में अमिट योगदान दिया है। इस पहल के माध्यम से अस्पताल का उद्देश्य न केवल संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है, बल्कि आम नागरिकों को उन महापुरुषों के आदर्शों से अवगत कराना भी है जिन्होंने राष्ट्र को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा लिए गए इस महत्वपूर्ण निर्णय के तहत, प्रवेश द्वारों को महात्मा गांधी, डॉ. बीआर आंबेडकर, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, स्वामी विवेकानंद, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, सरोजिनी नायडू, डॉ. एस. राधाकृष्णन, अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ. वीसी राय, भगत सिंह, मेजर ध्यानचंद जैसे प्रतिष्ठित नामों से सुसज्जित किया गया है। अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप बंसल ने इस कदम को संविधान की भावना को जीवंत श्रद्धांजलि बताते हुए कहा कि अब हर मरीज और उनके परिजन इन महापुरुषों के नाम से सुसज्जित द्वार से गुजरेंगे, जिससे उन्हें संवैधानिक मूल्यों और देश के गौरवशाली इतिहास की याद ताज़ा होगी।
इस अवसर पर अस्पताल परिसर में संविधान की प्रस्तावना का पाठ भी किया गया, जिसने माहौल में देशभक्ति और संवैधानिक चेतना को और गहरा किया। डॉ. बंसल ने जोर देकर कहा कि ये नाम केवल द्वारों की पहचान नहीं हैं, बल्कि ये हमारे हृदय में बसे उन मूल्यों के प्रतीक हैं जो न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुता पर आधारित हैं। हर आने-जाने वाला व्यक्ति इन द्वारों से गुजरते हुए इन महत्वपूर्ण सिद्धांतों को याद करेगा, जो एक मजबूत राष्ट्र के आधार हैं।
मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. चारु बंबा ने इसे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में संवैधानिक कर्तव्यों और मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल मरीजों के लिए बल्कि अस्पताल के कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी, जो उन्हें अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए संवैधानिक सिद्धांतों को ध्यान में रखने के लिए प्रेरित करेगा।
सभी विभागों में इस उपलक्ष्य पर विशेष जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की गईं। यह आयोजन राष्ट्रीय एकता और जनकल्याण के प्रति अस्पताल की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। माना जा रहा है कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में अस्पताल आने वाले मरीज, उनके तीमारदार और अस्पताल का स्टाफ इन महापुरुषों के नाम पर बने प्रवेश द्वारों से होकर गुजरेंगे। यह छोटा सा कदम उन्हें भारत के गौरवशाली इतिहास से जोड़े रखेगा और न्याय, स्वतंत्रता, समानता व बंधुता जैसे संवैधानिक स्तंभों की स्मृति को ताजा करेगा।
बौद्धों पर हिंदू पर्सनल लॉ लागू होने के विरोध में SC ने विधि आयोग को भेजा मामला
वसंत विहार आत्महत्या केस में नया मोड़, पति-सास पर उकसाने का आरोप, एफआईआर दर्ज
अफगानिस्तान में भारत की मदद, पाक की कार्रवाई से बढ़ी तनातनी
भारतीय अर्थव्यवस्था ने भरी ऊंची उड़ान, GDP 8% के पार, उम्मीदों को दी मात
धनुष और कृति सनोन की ‘तेरे इश्क में’ एक मिश्रित अनुभव
सरकार को अर्बन नक्सलियों से भी रहना होगा सतर्क, माओवाद उन्मूलन का लक्ष्य मार्च 2026 तक
बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर TMC का विरोध, चुनाव आयोग से की मुलाकात
इंस्टाग्राम रील्स अब भारतीय भाषाओं में भी होंगी ट्रांसलेट, एडिटर ऐप में नए फॉन्ट्स
