मुंबई प्रदूषण: महाराष्ट्र सरकार के तर्क को बॉम्बे हाई कोर्ट ने किया खारिज
मुंबई में बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को लेकर महाराष्ट्र सरकार द्वारा दिए गए इथियोपियाई ज्वालामुखी राख के तर्क को बॉम्बे हाई कोर्ट ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्राशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए अंखाड की पीठ ने स्पष्ट किया कि वित्तीय राजधानी में दृश्यता ज्वालामुखी विस्फोट से काफी पहले से ही खराब थी।
सुनवाई के दौरान, महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील ज्योति चव्हाण ने तर्क दिया था कि 23 नवंबर को इथियोपिया के हयली गुब्बी ज्वालामुखी के फटने से उठी राख के बादल पूरे भारत में फैल गए, जिससे राज्य में वायु गुणवत्ता और खराब हो गई। उन्होंने कहा कि मुंबई के कुछ इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार चला गया था, जिससे कई देशों में उड़ानें भी प्रभावित हुईं।
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा, ‘नहीं, नहीं… यह तो बस दो दिन पहले की बात है। इससे भी पहले, हम 500 मीटर से आगे देख नहीं पा रहे थे।’ उन्होंने सरकार के इस स्पष्टीकरण को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
यह मामला मुंबई में बढ़ते प्रदूषण के स्तर पर अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए शुरू की गई जनहित याचिका के तहत सुना जा रहा था। एमिकस क्यूरी (न्यायालय का मित्र) डेरियस खंबाटा ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि जब अदालत ने पहली बार इस पर ध्यान दिया था, तब मुंबई का AQI लगभग 200 था, जो अब 300 से ऊपर चला गया है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के अनुसार, 0-50 ‘अच्छा’, 51-100 ‘संतोषजनक’, 101-200 ‘मध्यम’, 201-300 ‘खराब’, 301-400 ‘बहुत खराब’, और 401-500 ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
एनजीओ वनशक्ति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जनक द्वारकादास ने अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। हाई कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों से हवा की गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।
मुख्य न्यायाधीश ने खंबाटा और द्वारकादास से पूछा, ‘आप हमें बताएं कि क्या कदम उठाए जा सकते हैं? सबसे प्रभावी उपाय क्या हो सकते हैं?’ पीठ ने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली में हर सर्दियों में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए उठाए गए उपायों के परिणामों का भी अध्ययन किया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को प्रदूषण के स्तर की जांच के लिए ‘ठोस कदम’ उठाने का निर्देश दिया है। बीएमसी की ओर से पेश वकील मिलिंद सठे ने बताया कि कुछ उपाय पहले ही शुरू किए जा चुके हैं।
बीएमसी ने यह भी निर्णय लिया है कि यदि मुंबई के कुछ इलाकों में AQI लगातार तीन दिनों तक 300 से नीचे नहीं आता है, तो GRAP IV (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) लागू किया जाएगा। इस योजना में निर्माण स्थलों को बंद करना भी शामिल है, जिन्हें मुंबई के प्रदूषण का एक प्रमुख कारण माना जाता है।
इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को जारी रहेगी।
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