संभल के कुएं से 45 साल पुराने हत्याकांड का राज़ खुला, व्यापारी के शव के साथ फेंका था सामान
संभल में पुराने वैभव की ओर लौटते शहर में एक ऐतिहासिक कुएं का पता चला है, जो 1978 के दंगे के एक खूनी अध्याय से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, उस दंगे में व्यापारी रामचरण दास रस्तोगी की निर्मम हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि हत्या के बाद उनके शव को दुकान के सामान के साथ इसी कुएं में फेंक दिया गया और फिर उसे मिट्टी से पाट दिया गया।
गत 24 नवंबर को इस कुएं के बारे में जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने तत्काल इसकी खुदाई कराने के निर्देश जारी किए। बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार सोनी और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणिभूषण तिवारी ने मजदूरों के साथ मौके पर पहुंचकर कुएं के आसपास की सफाई कराई और खुदाई का काम शुरू करवाया।
खुदाई कार्य में एक अप्रत्याशित बाधा उत्पन्न हुई, क्योंकि कुआं एक पेड़ के नीचे स्थित है। इस वजह से काम में व्यवधान आने पर वन विभाग के अधिकारियों को भी सूचित कर दिया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि यह कुआं लगभग 47 साल से बंद पड़ा था और इसी में 1978 के दंगे के दौरान एक व्यापारी को मारकर फेंकने की सूचना प्राप्त हुई है।
एकता पुलिस चौकी के पास स्थित इस ऐतिहासिक कुएं के बारे में रामचरण दास रस्तोगी के भतीजे सुशील कुमार (50) ने अधिकारियों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों से उन्होंने सुना था कि ताऊ रामचरण दास रस्तोगी की हत्या के बाद उनके शव के साथ उनकी दुकान का सारा सामान भी इसी कुएं में डालकर उसे बंद कर दिया गया था। उस समय दंगाइयों के आतंक के कारण परिवार वाले शव निकालने का साहस भी नहीं जुटा पाए थे।
उल्लेखनीय है कि 29 मार्च, 1978 को संभल में हुए दंगे में 100 से अधिक लोगों की जान गई थी। कई हिंदुओं को जिंदा जला दिया गया था और दर्जनों हिंदू परिवारों को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा था। इस दंगे से संबंधित 16 मुकदमों में से आठ को तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने 1994 में वापस ले लिया था, जबकि अन्य मुकदमे पैरवी के अभाव और गवाहों के मुकरने के कारण दम तोड़ गए।
यह पहली बार नहीं है जब संभल में ऐसे किसी ऐतिहासिक स्थल का खुलासा हुआ हो। इससे पहले खग्गू सराय मोहल्ले में 1978 से बंद पड़े एक शिव मंदिर और उसके बराबर के कुएं का भी पता चला था, जिसे मूर्तियों से पाट दिया गया था। इस वर्ष अधिकारियों ने न केवल मंदिर को खुलवाकर पूजा-पाठ शुरू कराया, बल्कि कुएं की भी खुदाई कराई। वर्तमान में उस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। संभल में अब तक करीब 55 ऐतिहासिक तीर्थ (मंदिर) और 19 कूपों की खोज की जा चुकी है, जिनका अपना धार्मिक महत्व है।
