75,000 किसानों के सहारे 400 करोड़ का कारोबार, जेकेएमपीसीएल की शानदार सफलता की कहानी!
जम्मू और कश्मीर दुग्ध उत्पादक सहकारी लिमिटेड (जेकेएमपीसीएल) एक दशक से भी कम समय में एक बीमार सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई से लाभ कमाने वाली संस्था बन गई है, जिसका सालाना कारोबार चार सौ करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इस सफलता से 75 हजार से अधिक डेयरी किसान जुड़े हैं, जिनमें 18 हजार महिला किसान शामिल हैं। जेकेएमपीसीएल का दुग्ध संयंत्र जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश का सबसे बड़ा डेयरी सहकारी संगठन है, जो प्रतिदिन लगभग 2 लाख लीटर दूध का प्रबंधन करता है। 1654 ग्राम डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से 75000 डेयरी किसान इससे संचालित होते हैं।
पिछले वर्ष बिक्री आय में 20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अब 406 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार हो गया है। इसका मुख्य कारण आधुनिकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन और ग्राहक संतुष्टि पर ध्यान केंद्रित करना है। यह सफलता भारत के मिल्कमैन के रूप में लोकप्रिय स्वर्गीय डॉ वर्गीस कुरियन की सलाह पर 2004 में गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ के साथ की गई विशेष व्यवस्था से शुरू हुई। इस व्यवस्था के तहत जेकेएमपीसीएल को उनके मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता, विपणन विशेषज्ञता, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली और रणनीतिक दिशा से लाभ हुआ है।
जेकेएमपीसीएल अमूल और स्नो कैप के नाम से अपने उत्पाद बेच रही है। 2018-19 में जहां 15340 दूध उत्पादक थे, वहीं आज उनकी संख्या 75000 है। इसका कारोबार भी 2018-19 में 47 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 407 करोड़ रुपये हो गया है। वर्तमान में यह छह दूध उत्पादों – छाछ, घी, पनीर, खीर और आइसक्रीम का उत्पादन कर रहा है और कलरी बनाने की योजना पर काम चल रहा है। हाल ही में एक नया आधुनिक टेट्रा पैक प्लांट भी चालू किया गया है। सरकार चाहती है कि 100 प्रतिशत दूध संगठित क्षेत्र से आए, जिससे गुणवत्तापूर्ण उत्पाद सुनिश्चित होंगे।
