गर्भावस्था में योग: मां और शिशु के स्वास्थ्य के लिए वरदान, सामान्य प्रसव की संभावना बढ़ाए yoga
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में योग एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। पीजीआई के मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य विभाग में आठ वर्ष से गर्भवती महिलाओं को नियमित योगाभ्यास कराया जा रहा है। यहां भर्ती उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली महिलाओं के लिए योग तनाव और प्रसव की चिंता को कम करने में बेहद मददगार साबित हो रहा है।
विभाग की प्रमुख डॉ. मंदाकिनी प्रधान के अनुसार, योग न केवल गर्भवती महिला को स्वस्थ रखता है, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए भी आवश्यक है। योगाचार्य वंदना मिश्रा और स्टाफ नर्स रीता वर्मा बताते हैं कि तितली आसन, सुखासन, भ्रामरी प्राणायाम और पेल्विक स्ट्रेचिंग जैसे अभ्यासों से पीठ दर्द व सूजन में राहत मिलती है। इससे शरीर लचीला बनता है और सामान्य प्रसव की संभावना बढ़ती है। ट्विन प्रेग्नेंसी और अनियंत्रित डायबिटीज से पीड़ित एक महिला ने बताया कि नियमित योग से उसका शुगर लेवल नियंत्रित रहता है और मन शांत रहता है। डॉक्टरी सलाह और देखरेख में किया गया योग गर्भावस्था को सुरक्षित और सुखद बना सकता है।
