आयुष निदेशालय ने मांगी आयुर्वेदिक अस्पतालों में दवाओं की कमी का डेटा
राज्य के सरकारी आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीजों को दवाओं की किल्लत का सामना न करना पड़े, इसके लिए आयुष निदेशालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। निदेशालय ने प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक अस्पतालों से दवाओं की कमी से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को आवश्यक दवाएं समय पर उपलब्ध हों और उनके इलाज में किसी भी प्रकार की रुकावट न आए।
सूत्रों के अनुसार, आयुष निदेशालय ने सभी अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से यह डेटा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जानकारी जुटाने के लिए गूगल शीट का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें अस्पतालों से उनके वर्तमान स्टॉक, दवाओं की खपत और कमी का पूरा ब्योरा मांगा गया है। इस डेटा के आधार पर एक विस्तृत अनुमान तैयार किया जाएगा, जिसके बाद आवश्यक औषधियों की खरीद और आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
हाल के महीनों में, कई आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में महत्वपूर्ण दवाओं की अनुपलब्धता की खबरें सामने आई थीं। वाराणसी मंडल जैसे क्षेत्रों में, जहां मानक के अनुसार 200 से अधिक प्रकार की दवाओं की आवश्यकता है, वहां केवल कुछ ही दवाएं उपलब्ध थीं। योगराज गुग्गुल, अश्वगंधा चूर्ण, दशमूलारिष्ट और सितोपलादि चूर्ण जैसी आवश्यक दवाएं न मिलने के कारण सैकड़ों ग्रामीण, बुजुर्ग और गरीब मरीज निराश होकर लौट रहे थे। कोरोना काल के बाद आपूर्ति श्रृंखला में अनियमितता और निदेशालय से दवाओं की आपूर्ति में देरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया था।
अब, निदेशालय द्वारा मांगी गई इस जानकारी के आधार पर, उम्मीद है कि जल्द ही दवाओं की कमी को पूरा किया जाएगा और मरीजों को एक रुपये के पर्चे पर भी निशुल्क दवाएं उपलब्ध होने लगेंगी। यह कदम प्रदेश की प्राचीन आयुर्वेदिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने और आम जनता तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
