अयोध्या में मतदाता सूची संशोधन में गंभीर खामियां, प्रक्रिया बाधित
अयोध्या के रुदौली क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू हुए लगभग तीन सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन इसमें कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं, जिससे यह प्रक्रिया बाधित हो रही है। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को प्रत्येक मतदाता के घर तीन बार जाकर जानकारी एकत्र करनी होती है और भरे हुए फार्म को ऑनलाइन भी करना होता है। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके विपरीत है।
सूत्रों के अनुसार, कई मोहल्लों में बीएलओ अभी तक घर-घर नहीं पहुंचे हैं। इसके अलावा, उन्हें सही फार्म भरने की जानकारी का भी अभाव है। स्थानीय सभासदों और बुद्धिजीवियों की मदद से मतदाताओं के फार्म भरे जा रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या मोहल्ला पूरेखान, पूरे बसावन, वजीरगंज, मख्दूमजादा, कटरा, घोसियाना, सोफियाना उत्तरी, शेखाना दक्षिणी, और रसूलाबाद जैसे इलाकों में है। इन मोहल्लों की वर्ष 2003 की मतदाता सूची बीएलओ को उपलब्ध नहीं कराई गई है, और न ही यह चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद है।
यह स्थिति मतदाता सूची संशोधन की समय-सीमा, जो 4 दिसंबर निर्धारित है, को पूरा करने पर सवालिया निशान लगा रही है। चुनाव आयोग ने वर्ष 2003 की निर्वाचक नियमावली को वर्ष 2025 की नियमावली से संलग्न कर वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया है। इस तकनीकी खामी के कारण, जब बीएलओ फार्म अपलोड करने का प्रयास करते हैं, तो विकल्प एक व दो खुलते ही नहीं हैं। मजबूरन, मतदाताओं को नए वोटर की तरह विकल्प तीन में स्वयं को पंजीकृत कराना पड़ रहा है, जिससे प्रक्रिया जटिल हो गई है।
इस समस्या को देखते हुए, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों ने एसआईआर प्रक्रिया की समय-सीमा बढ़ाने और चुनाव आयोग की वेबसाइट पर आ रही तकनीकी समस्याओं को दूर करने की मांग की है। उनका मानना है कि इससे मतदाताओं को परेशानी से बचाया जा सकेगा और सूची का सही ढंग से संशोधन हो सकेगा।
इस संबंध में, उपजिलाधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि मैपिंग का कार्य बीएलओ के माध्यम से ऑफलाइन कराया जाएगा। जिन मतदाताओं के नाम वर्ष 2003 और 2025 की निर्वाचक नियमावली में शामिल हैं, उन्हें नोटिस नहीं भेजा जाएगा और उनका नाम ड्राफ्ट सूची में स्वतः आ जाएगा।
