माओवादियों के गढ़ में विकास की बयार: बस्तर के इस गांव में 4G नेटवर्क आने पर झूमे ग्रामीण
जब देश के बड़े हिस्से में 5जी नेटवर्क से बातें हो रही हैं, तब छत्तीसगढ़ के अति-संवेदनशील बस्तर के बीजापुर जिले में एक गांव में सिर्फ 4जी नेटवर्क आने पर ही जश्न जैसा माहौल छा गया। तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित कोंडापल्ली गांव में पहली बार मोबाइल नेटवर्क पहुंचते ही ग्रामीण खुशी के मारे मांदर की थाप पर नाच उठे। दशकों तक माओवादी हिंसा से पीड़ित यहां के ग्रामीण सड़क, बिजली और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे हैं।
जैसे ही अधिकारियों ने घोषणा की कि टावर काम करना शुरू हो चुका है, गांव में उत्सव की लहर दौड़ गई। महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी एक साथ इकट्ठे होकर रैली की शक्ल में टावर स्थल तक पहुंचे। वहां पारंपरिक विधि से टावर की पूजा-अर्चना की गई और फिर मांजर (स्थानीय वाद्य यंत्र) की थाप पर ग्रामीण भावुक होकर नाच उठे। सुरक्षा बलों के जवानों ने भी उनकी खुशी में शामिल होकर मिठाइयां बांटी। यह दृश्य दिखाता है कि यह सुविधा उनके लिए केवल तकनीकी नहीं, बल्कि बाहरी दुनिया से पहला वास्तविक जुड़ाव है।
माओवादी हिंसा का खौफ हटने के बाद यहां के युवा भी अब इंटरनेट की दुनिया में अपना कदम बढ़ाने को तैयार हो गए हैं। बीते दो वर्षों में संचार अधोसंरचना को मजबूत करने में भारी सफलता मिली है। क्षेत्र में कुल 728 नए टावर स्थापित किए गए हैं। जिनमें 467 विशेष रूप से 4-जी नेटवर्क के लिए लगाए गए हैं। साथ ही, 449 टावरों को 2जी से 4जी में अपग्रेड किया गया है।
राज्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार में बस्तर में माओवादियों के खिलाफ बंदूक और विकास दोनों से लड़ाई चल रही है। विकास की लड़ाई के लिए साय सरकार ने नियद नेल्ला नार योजना (आपका सबसे अच्छा गांव) शुरू की थी। इसके चलते बस्तर के सैकड़ों गांवों में विकास की बयार बहने लगी है। कोंडापल्ली की यह सफलता भी ”नियद नेल्ला नार” योजना का परिणाम है।
