बांग्लादेश में क्यों भड़की भारत विरोधी भावना? शेख हसीना की सत्ता जाने के बाद बढ़ा ‘Bangladesh unrest’
बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता से बेदखली के बाद से ही भारत विरोधी भावनाएं चरम पर हैं। हाल ही में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या ने इन भावनाओं को और भड़का दिया है, जिसके बाद देश भर में बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी सीधे तौर पर भारत को हसीना सरकार के समर्थन के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
शेख हसीना के शासनकाल के दौरान, भारत और बांग्लादेश के संबंध काफी मजबूत थे। हसीना ने भारत को हमेशा एक ‘महान मित्र’ बताया और 1971 के मुक्ति संग्राम में भारत की भूमिका को याद किया। हालांकि, उनके आलोचक और विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगाते रहे कि हसीना सरकार भारत समर्थक है और उसने भारत के हितों को प्राथमिकता दी।
जनता का बदलता रुख
बांग्लादेश में जनता के बीच भारत के प्रति धारणा तेजी से बदली है। एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, बांग्लादेशी जनता का एक बड़ा हिस्सा (75 प्रतिशत से अधिक) चीन के साथ संबंधों को सकारात्मक रूप से देखता है, जबकि भारत के प्रति यह सकारात्मकता केवल 11 प्रतिशत है। यह बदलाव दर्शाता है कि बांग्लादेशी जनता भारत को एक ‘दबंग पड़ोसी’ के रूप में देखती है, जिसने हसीना के कथित सत्तावादी शासन को समर्थन दिया।
हादी की हत्या और विरोध प्रदर्शन
दिसंबर 2025 में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद विरोध प्रदर्शनों में तेजी आई। हादी, इंकलाब मंच के प्रवक्ता थे और भारत विरोधी रुख के लिए जाने जाते थे। उनकी मौत के बाद प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हादी के हत्यारे भारत भाग गए हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया। प्रदर्शनों के दौरान कई हिंसक घटनाएं हुईं, जिसमें आगजनी और मीडिया घरानों को निशाना बनाना शामिल है। एक हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या भी कर दी गई, जिसने स्थिति को और गंभीर बना दिया। प्रदर्शनकारी इंकलाब मंच ने हादी की मौत को ‘भारतीय आधिपत्य’ के खिलाफ संघर्ष में शहादत बताया।
