पश्चिम चंपारण: PHC में ताला, गायब डॉक्टर-कर्मी; मरीज भगवान भरोसे!
पश्चिम चंपारण के हरनाटांड़ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां संसाधनों की भारी कमी के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों की घोर लापरवाही और मनमानी मरीजों के लिए मुसीबत बन गई है। पीएचसी की पड़ताल में पता चला कि यह केंद्र अब केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है, जहां मरीजों को समुचित इलाज के बजाय अन्यत्र भेज दिया जाता है।
जांच के दौरान सोमवार सुबह 11 बजे निबंधन काउंटर पर दो कर्मियों की जगह केवल एक कर्मी मौजूद था। वाइटल काउंटर पर भी एक ही एएनएम कार्यरत पाई गईं। ओपीडी में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजेन्द्र काजी उपस्थित थे, लेकिन कई महत्वपूर्ण कार्यालयों पर ताला लटका मिला। बीपीएमयू कार्यालय खाली था, वहीं स्थापना कार्यालय पर ताला लगा था। न तो परिचारी, न डाटा एंट्री ऑपरेटर और न ही लिपिक व लेखपाल मौजूद थे।
गैरहाजिर कर्मियों के बारे में पूछने पर बताया गया कि पीएचसी प्रभारी सहित अन्य कर्मचारी जिला मुख्यालय में डीएम की बैठक में शामिल होने गए हैं। इस लापरवाही का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। प्रतिदिन 50 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें डॉग बाइट, सर्दी-खांसी और बुखार के मरीज अधिक होते हैं।
हालांकि, औषधि वितरक के अनुसार ओपीडी में 133 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें जीवन रक्षक दवाएं भी शामिल हैं। एंटी रेबीज वैक्सीन और खांसी की दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में हैं। जांच घर में लैब तकनीशियन ने बताया कि कई जांचें की जा रही हैं, लेकिन टायफाइड की जांच की सुविधा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि डिजिटल एक्स-रे सेवा पूरी तरह से बंद है, जिससे गंभीर मरीजों को बाहर जाना पड़ता है।
