पश्चिम बंगाल राजनीति: हुमायूं कबीर ने उम्मीदवार को हटाया, ‘हिंदू होने’ पर भेदभाव का आरोप
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर की नवगठित पार्टी ‘जनता उन्नयन पार्टी’ ने अपनी उम्मीदवार निशा चटर्जी को 24 घंटे के भीतर ही हटा दिया है। पार्टी ने इस फैसले के पीछे निशा के ‘अश्लील’ सोशल मीडिया रील्स को कारण बताया है। हालांकि, निशा चटर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए हुमायूं कबीर पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
निशा चटर्जी ने दावा किया कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह हिंदू हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के उम्मीदवार घोषित किया गया था और अब उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि अगर पार्टी को उनके सोशल मीडिया कंटेंट से आपत्ति थी, तो उन्हें उम्मीदवार क्यों बनाया गया। चटर्जी ने कहा कि उन्हें ‘बांग्लादेशी’ और ‘हिंदू’ होने के नाम पर अपमानित किया जा रहा है।
चटचटर्जी ने पार्टी के धर्मनिरपेक्ष होने के दावों पर सवाल उठाया। उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने पहले हुमायूं कबीर के उस रुख का समर्थन किया था जिसमें उन्होंने बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने की बात कही थी। यही मुद्दा टीएमसी से उनके निष्कासन का कारण बना था। चटर्जी ने कहा कि इसके बावजूद उन्हें निशाना बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कबीर ने उनकी सोशल मीडिया फॉलोइंग का इस्तेमाल अपनी नई पार्टी के लिए पब्लिसिटी पाने के लिए किया।
निशा चटर्जी ने बताया कि इस घटना के बाद उन्हें लगातार ट्रोलिंग और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कुछ होता है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा। उन्होंने हुमायूं कबीर को चेतावनी दी कि उन्हें लोगों की भावनाओं और करियर के साथ नहीं खेलना चाहिए, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम। उन्होंने कबीर पर चरित्र हनन का मुकदमा करने की भी धमकी दी है।
