वेनेजुएला संकट: अमेरिका क्यों कर रहा है मादुरो सरकार पर हमला? ड्रग्स, तेल या वामपंथी शासन
वेनेजुएला लंबे समय से अमेरिका के निशाने पर रहा है। अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर ड्रग्स तस्करी और वामपंथी तानाशाही शासन चलाने का आरोप लगाया है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि मादुरो की दमनकारी नीतियों के कारण 2013 के बाद से 80 लाख नागरिक पलायन करके अमेरिका पहुंचे हैं। अमेरिका ने मादुरो पर फेंटेनिल और कोकीन जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी बढ़ाने का भी आरोप लगाया है।
अमेरिका ने वेनेजुएला के दो आपराधिक संगठनों, ट्रेन डी आरागुआ और कार्टेल डी लास सोल्स को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है। अमेरिका का आरोप है कि दूसरा संगठन खुद मादुरो के नेतृत्व में चलता है। हालांकि, मादुरो ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका ‘ड्रग्स के खिलाफ जंग’ को बहाना बनाकर उन्हें सत्ता से हटाना और वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर कब्जा करना चाहता है। विश्लेषकों का मानना है कि ‘कार्टेल डी लास सोल्स’ कोई संगठित गिरोह नहीं, बल्कि भ्रष्ट अधिकारियों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है जो कोकीन को वेनेजुएजुएला के रास्ते आगे जाने देते हैं।
अमेरिका ने हाल ही में क्षेत्र में बड़ा सैन्य जमावड़ा किया है, जिसमें कैरिबियाई क्षेत्र में तैनात एक विमानवाहक पोत, युद्धपोत और अत्याधुनिक लड़ाकू विमान शामिल हैं। यूनाइटेड स्टेट्स सदर्न कमांड के मुताबिक 15 हजार सैनिक दिसंबर से क्षेत्र में तैनात हैं। अगस्त में ट्रंप प्रशासन ने पेंटागन के साथ एक गुप्त निर्देश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें वेनेजुएला के ड्रग कार्टेल को निशाना बनाने की बात कही गई थी।
मादुरो सरकार पर प्रतिबंधों को और कड़ा किया गया तथा प्रशांत महासागर और कैरिबियाई सागर में कथित रूप से ड्रग तस्करी में शामिल जहाजों पर 35 घातक हमले करवाए गए, जिनमें 100 से ज्यादा लोग मारे गए। अमेरिकी सैन्य जमावड़े में अमेरिकी सेना ने ट्रांसपोर्ट और कार्गो विमान भी लगा रखे थे। न्यूयॉर्क टाइम्स को मिले फ्लाइट ट्रैकिंग डाटा के मुताबिक भारी मालवाहक सी-17 विमानों का बड़े पैमाने पर सैनिकों और साजो-सामान ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया।
वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो 1992 में तत्कालीन सैन्य अधिकारी ह्यूगो शावेज के नेतृत्व में राजनीति में आए और उनके करीबी बन गए। शावेज के शासनकाल में मादुरो नेशनल असेंबली के अध्यक्ष और विदेश मंत्री भी बने। शावेज ने अपने निधन से पहले मादुरो को अपना उत्तराधिकारी चुना और 2013 में मादुरो ने चुनाव जीता और वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने। मादुरो के शासनकाल में देश भारी आर्थिक संकट में घिर गया और महंगाई चरम पर पहुंच गई। उनके शासनकाल को चुनावों में धांधली, खाद्य संकट और अधिकारों के हनन के लिए जाना जाता है।
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