वक्फ संपत्तियों का विवरण अपलोड: समय सीमा बढ़ाने से SC का इनकार, ट्रिब्यूनल जाने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने ‘उम्मीद’ पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों का विवरण अपलोड करने की समय सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर दायर की गई याचिकाओं को सोमवार को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को इस संबंध में वक्फ कानून के तहत गठित ट्रिब्यूनल के समक्ष अर्जी दाखिल करने की सलाह दी है। अदालत ने कहा कि ट्रिब्यूनल मामले की वास्तविकता को देखते हुए समय सीमा बढ़ाने पर निर्णय ले सकता है।
यह फैसला न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और ऑगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ ने सुनाया। ‘उम्मीद’ पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों का ब्योरा अपलोड करने की छह महीने की कानूनी समय सीमा छह दिसंबर को समाप्त हो रही है। इस सीमा को बढ़ाने के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी सहित कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जियां दाखिल की थीं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि वक्फ अधिनियम पर अंतरिम रोक के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का फैसला लंबे समय तक सुरक्षित रहने के कारण काफी समय बीत गया। इस वजह से कई संपत्तियों का विवरण अभी तक पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाया है। उन्होंने दलील दी कि छह दिसंबर की समय सीमा बहुत कम है और इसमें सभी वक्फ संपत्तियों का ब्योरा अपलोड करना संभव नहीं है, इसलिए समय सीमा बढ़ाई जानी चाहिए।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वक्फ कानून में ही छह महीने की समय सीमा तय की गई है और वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण का नियम 1929 से चला आ रहा है। मेहता ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता एक तरह से वक्फ कानून की धारा 3बी में संशोधन की मांग कर रहे हैं, जिसमें समय सीमा बढ़ाने का प्रावधान है। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ट्रिब्यूनल के समक्ष अर्जी दे सकते हैं, और यदि ट्रिब्यूनल को कारण वास्तविक लगते हैं तो वह समय सीमा बढ़ा सकती है। मेहता ने बताया कि कई लोगों ने पहले ही संपत्तियों का विवरण अपलोड कर दिया है।
इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि सभी 10 लाख मुतवल्लियों को ट्रिब्यूनल में अर्जी देनी पड़ी तो यह एक बड़ी परेशानी होगी। उन्होंने ब्योरा अपलोड करने में आ रही तकनीकी दिक्कतों का भी उल्लेख किया। हालांकि, पीठ याचिकाकर्ताओं की दलीलों से प्रभावित नहीं हुई और स्पष्ट कर दिया कि वे कानून के अनुसार समय सीमा बढ़ाने के लिए ट्रिब्यूनल में आवेदन कर सकते हैं, और ट्रिब्यूनल प्रत्येक मामले की जांच कर निर्णय लेगी।
