वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण: समय सीमा नहीं बढ़ी, पर मिलेगी छूट
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया है कि वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की समय सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। शुक्रवार को उन्होंने उम्मीद पोर्टल पर पंजीकरण की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जिन लोगों ने पंजीकरण का प्रयास किया था लेकिन विभिन्न कारणों से इसे पूरा नहीं कर सके, उनके लिए एक समाधान निकाला जाएगा। ऐसे लोगों को अगले तीन महीनों के लिए जुर्माने से छूट दी जाएगी, जिससे वे अपनी प्रक्रिया पूरी कर सकें।
रिजिजू ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के कारण पंजीकरण की समय सीमा को बढ़ाना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि शुक्रवार सुबह तक, 1.51 लाख वक्फ संपत्तियों को पंजीकृत किया जा चुका था, जबकि देश भर में कुल वक्फ संपत्तियों की संख्या लगभग नौ लाख होने का अनुमान है। मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि जिन मुतवल्लियों (वक्फ संपत्तियों की देखरेख करने वाले) ने अभी तक पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया है, वे अपनी संबंधित वक्फ न्यायाधिकरणों से संपर्क कर सकते हैं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने छह जून को एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास (यूएमईईडी- उम्मीद) पोर्टल लॉन्च किया था। इस पोर्टल का उद्देश्य सभी वक्फ संपत्तियों की जियो-टैगिंग के बाद एक डिजिटल सूची तैयार करना था। पोर्टल के नियमों के अनुसार, अगले छह महीनों के भीतर देशभर की सभी वक्फ संपत्तियों की जानकारी इस पर अपलोड की जानी थी, जिसकी अंतिम तिथि शुक्रवार को समाप्त हो गई।
मंत्री ने स्वीकार किया कि लाखों वक्फ संपत्तियां अभी भी पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हो पाई हैं। उन्होंने बताया कि कई सांसदों और सामाजिक नेताओं ने पंजीकरण के दौरान आने वाली समस्याओं से उन्हें अवगत कराया है। उन्होंने राज्यों के प्रदर्शन में अंतर का भी उल्लेख किया, जिसमें कर्नाटक, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि अन्य राज्य पिछड़ गए।
रिजिजू ने देरी के कुछ कारणों का भी उल्लेख किया, जैसे कि कुछ स्थानों पर इंटरनेट की धीमी गति और कुछ लोगों के पास आवश्यक कागजात का अभाव। उन्होंने दोहराया कि जिन मुतवल्लियों की पंजीकरण प्रक्रिया अधूरी रह गई है, वे अगले तीन महीनों में इसे पूरा कर सकते हैं और इस दौरान सरकार कोई सख्त कार्रवाई नहीं करेगी।
