विवाह पंचमी पर राम रक्षा स्तोत्र पाठ से पाएं संकटों से मुक्ति
हर साल की तरह इस वर्ष भी मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, जो कि 25 नवंबर को पड़ रही है, को विवाह पंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। यह शुभ दिन भगवान राम और माता सीता के विवाह का प्रतीक है। इस विशेष अवसर पर भक्तजन भगवान राम और मां जानकी की भक्ति भाव से पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे उनके जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विवाह पंचमी के दिन भगवान राम और माता सीता को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों और संकटों से मुक्ति मिलती है। यह स्तोत्र भगवान राम की स्तुति में रचा गया है और इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।
राम रक्षा स्तोत्र की शुरुआत इस प्रकार होती है:
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं।
पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्॥
वामाङ्कारूढ-सीता-मुखकमल-मिलल्लोचनं नीरदाभं।
नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
यह स्तोत्र भगवान राम के दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है और माना जाता है कि इसके नियमित पाठ से जीवन में सुरक्षा, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। विवाह पंचमी के दिन इस स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
इसके अतिरिक्त, ‘चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्’ जैसी चौपाइयों का पाठ भी भगवान राम की महिमा का गुणगान करता है। इस पर्व पर भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और रामचरितमानस का पाठ भी करते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह रिश्तों में पवित्रता और प्रेम का भी प्रतीक है, ठीक वैसे ही जैसे भगवान राम और माता सीता का मिलन हुआ था। इस दिन किए गए उपाय और पूजा-पाठ का महत्व कई गुना बढ़ जाता है, जिससे भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।
