वाराणसी में कफ सिरप तस्करी: 28 दवा फर्मों के लाइसेंस रद्द, जांच शुरू
वाराणसी में कफ सिरप की तस्करी का भंडाफोड़ होने के बाद हड़कंप मच गया है। विशेष कार्य बल (एसटीएफ) लखनऊ द्वारा अमित सिंह टाटा की गिरफ्तारी के बाद इस रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। सूत्रों के अनुसार, अमित सिंह टाटा ने कथित तौर पर अपने पिता अशोक कुमार सिंह के नाम पर ‘अन्विन्या मेडिकल एजेंसी’ नामक फर्म पंजीकृत कराई थी। इसी फर्म के माध्यम से वाराणसी में कफ सिरप की तस्करी को अंजाम दिया जा रहा था।
इस खुलासे के बाद ड्रग विभाग की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है, जबकि पुलिस की विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। इस फर्म के खिलाफ कोतवाली थाने में एक मामला भी दर्ज किया गया है।
कफ सिरप तस्करी के इस बड़े खेल में संलिप्त पाए जाने पर अब तक 28 दवा फर्मों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, 12 अन्य फर्मों के लाइसेंस भी रद्द करने की तैयारी चल रही है। यह कार्रवाई अवैध दवा व्यापार पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जांच दल इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस तस्करी रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और इसका नेटवर्क कितना बड़ा है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि किस प्रकार से ये फर्म लाइसेंसिंग नियमों का उल्लंघन कर रही थीं और किस माध्यम से कफ सिरप की तस्करी की जा रही थी। यह मामला स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है, क्योंकि इस तरह के अवैध कारोबार से न केवल राजस्व को नुकसान होता है, बल्कि जन स्वास्थ्य को भी गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।
