उत्तराखंड के फार्मा उद्योग ने चीन के कच्चे माल से ₹1400 करोड़ का निर्यात किया, वैश्विक बाजार में बढ़ी ‘uttarakhand pharma news’ की साख
उत्तराखंड का दवा उद्योग वैश्विक बाजार में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। राज्य ने हाल ही में चीन से आयातित कच्चे माल का उपयोग करके ₹1400 करोड़ की दवाओं का निर्यात किया है। यह उपलब्धि उत्तराखंड के कुल निर्यात में फार्मा सेक्टर की हिस्सेदारी को लगभग 18 प्रतिशत तक ले गई है। हरिद्वार, देहरादून और रुड़की के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित सैकड़ों फार्मा इकाइयां इस सफलता की मुख्य आधार हैं।
इन इकाइयों में पैरासिटामोल, इबुप्रोफेन, एजिथ्रोमाइसिन और एंटीबायोटिक्स जैसी महत्वपूर्ण दवाओं का उत्पादन किया जाता है। इन दवाओं के निर्माण के लिए एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (APIs) और अन्य इंटरमीडिएट्स का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। वर्तमान में, राज्य की फार्मा इकाइयां कच्चे माल के लिए चीन पर 65 प्रतिशत तक निर्भर हैं। अपनी तकनीकी दक्षता का उपयोग करके, ये इकाइयां इन कच्चे मालों को जीवनरक्षक दवाओं में बदल रही हैं, जिनका निर्यात एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों में किया जाता है।
इस सफलता के बाद, राज्य सरकार अब कच्चे माल के लिए आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सरकार का मानना है कि उत्तराखंड में बल्क ड्रग पार्क और फार्मा केमिकल हब विकसित करके घरेलू उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए सिडकुल क्षेत्रों में पहले से उपलब्ध बुनियादी ढांचे (जमीन, बिजली, पानी) का उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही, चीन पर निर्भरता कम करने के लिए दक्षिण कोरिया, जापान और ताइवान जैसे देशों से कच्चे माल की सोर्सिंग बढ़ाने की योजना भी बनाई जा रही है।
