खामेनेई की मौत पर लखनऊ में उबाल, इमामबाड़ा तीन दिन के लिए बंद
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई के निधन की खबर से लखनऊ का पुराना शहर रविवार शाम को उबाल पर आ गया। छोटे इमामबाड़े पर आयोजित शोक सभा और कैंडल मार्च में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। मातम के बीच पुतले फूंके गए, अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जोरदार नारे लगे और सभी की आंखें नम रहीं। रविवार को रोजा इफ्तार के बाद से ही छोटे इमामबाड़े पर भीड़ जुटने लगी थी, जो रात आठ बजे तक 20 से 25 हजार तक पहुंच गई। अधिकांश लोगों के हाथों में खामेनेई की तस्वीरें थीं और वे उनके निधन से अत्यंत दुखी थे।
मौलाना कल्बे जवाद और मौलाना यासूब अब्बास ने खामेनेई की शहादत पर शोक व्यक्त करते हुए अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई को कायराना बताया। अजादारी रोड पर हजारों लोग इकट्ठा हो गए, जहां मोमबत्तियां जलाकर कैंडल मार्च निकाला गया। जगह-जगह अमेरिकी राष्ट्रपति और इजरायल के प्रधानमंत्री के पुतले फूंके गए।
शिया समुदाय के नेताओं की प्रतिक्रिया
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने खामेनेई की हत्या की कड़ी निंदा की और इसे शिया मुसलमानों के लिए गहरा आघात बताया। उन्होंने खामेनेई को शहीद करार देते हुए कहा कि यह इस्लामी दुनिया के नेतृत्व पर हमला है। मौलाना यासूब अब्बास ने अमेरिका, इजरायल और सऊदी अरब पर मिलीभगत का आरोप लगाया और रमजान में ईरान पर हमले को मानवता के खिलाफ अपराध बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की और विश्वास जताया कि ईरान इस संकट से मजबूती से उभरेगा। मौलाना ने तीन दिन के शोक का आह्वान किया और लोगों से काले झंडे फहराने व काले कपड़े पहनने की अपील की।
पर्यटकों के लिए इमामबाड़ा बंद
मौलाना यासूब अब्बास ने घोषणा की कि लखनऊ के ऐतिहासिक बड़ा इमामबाड़ा और छोटा इमामबाड़ा अगले तीन दिनों तक पर्यटकों के लिए बंद रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह समय शोक और एकजुटता प्रदर्शित करने का है, ताकि दुनिया को संदेश दिया जा सके कि शिया समुदाय अपने नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ा है।
विरोध प्रदर्शन का स्वरूप
रविवार को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले और खामेनेई के निधन की सूचना आते ही पुराने लखनऊ में शिया समुदाय के लोग नारे लगाते हुए अजादारी रोड पर पहुंच गए। हाथों में सैयद अली खामेनेई की फोटो लिए लोग मातम मनाते हुए अमेरिका और इजरायल मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे। सैकड़ों की तादाद में लोग छोटे इमामबाड़े से लेकर बड़े इमामबाड़े तक एकत्रित हो गए। हर घर से ‘खामेनेई अमर रहे’ के नारे गूंज रहे थे। हुसैनाबाद के शाही गेट से बड़े इमामबाड़े तक सभी दुकानें बंद रहीं, जिनमें आवश्यक सेवाओं की दुकानें भी शामिल थीं। विरोध प्रदर्शन में महिलाएं, युवा और बच्चे भी शामिल थे, जिन्होंने काले झंडे, पोस्टर और खामेनेई की तस्वीरें थाम रखी थीं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने फूट-फूटकर रोते हुए इसे बड़ी साजिश करार दिया। बुर्का पहने महिलाएं भी मातम करती नजर आईं। लखनऊ, जो भारत का प्रमुख शिया केंद्र है, में यह प्रतिक्रिया तेज रही क्योंकि यहां की शिया आबादी ईरान के धार्मिक नेतृत्व से गहरा जुड़ाव रखती है।
ईरान में रह रहे परिवार की चिंता
लखनऊ के मौलाना गुलाम रजा, जो पिछले 30 वर्षों से ईरान में रह रहे हैं, अपने परिवार के लिए चिंतित हैं। उनकी पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा ईरान के कुम शहर में हैं। दिसंबर में लखनऊ आए मौलाना गुलाम रजा का शनिवार को परिवार से संपर्क हुआ था, लेकिन उसके बाद इंटरनेट बंद होने से कोई खबर नहीं मिल पा रही है।
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