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लखीमपुर जेल में बंदी की मौत से बवाल: इंस्पेक्टर समेत 4 पुलिसकर्मी निलंबित, परिवार ने लगाए गंभीर आरोप, क्या है पूरा मामला?

By Dec 8, 2025

लखीमपुर खीरी: जिला कारागार में बंदी सुरेश कुमार वर्मा की मौत के बाद मचे बवाल के बाद एसपी संकल्प शर्मा ने कड़ी कार्रवाई की है। सुरेश कुमार वर्मा की जेल में कथित आत्महत्या के मामले में पुलिस अधीक्षक ने धौरहरा के कोतवाल शिवाजी दुबे के साथ तीन सिपाहियों को निलंबित कर दिया है। इसी प्रकरण में जेल अधीक्षक ने भी एक वार्डन को सस्पेंड किया है।

मृतक सुरेश कुमार वर्मा के परिवारीजन लगातार धौरहरा कोतवाल शिवाजी दुबे को निशाने पर ले रहे थे। उनका आरोप था कि पुलिस ने बिना किसी पुख्ता सबूत या साक्ष्य के सुरेश को जेल भेजा। परिवार का कहना है कि इसी बात से आहत होकर सुरेश ने जेल के शौचालय में गमछा से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

शुक्रवार सुबह जिला कारागार की बैरक के शौचालय में 55 वर्षीय सुरेश चंद्र का शव एंगल से गमछे के फंदे से लटकता मिला। धौरहरा कोतवाली पुलिस ने उन्हें गुरुवार को कारागार में दाखिल कराया था। बंदी के परिवार वाले आत्महत्या की बात को मनगढ़ंत कहानी बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह संभव ही नहीं। इस घटना से जेल और जिला प्रशासन में खलबली मच गई है।

डीएम और एसपी ने जेल जाकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और जेल अधीक्षक से मामले की जानकारी ली। परिवार वालों के आरोपों और धौरहरा पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों का संज्ञान लेते हुए एसपी संकल्प शर्मा ने धौरहरा कोतवाल शिवाजी दुबे के साथ सिपाही रोहित, विनीत व सनी कुमार को सस्पेंड कर दिया है। इस पूरे प्रकरण की जांच सीओ धौरहरा को सौंपी गई है। एसपी ने बताया कि अगली कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

धौरहरा के माधौपुरवा गांव के सुरेश कुमार वर्मा को गांव की 40 वर्षीय सीमा की हत्या के आरोप में पुलिस कोतवाली ले गई थी। घरवालों का आरोप है कि पुलिस ने चार दिन तक कोतवाली में रखकर उन्हें प्रताड़ित किया और फिर गुरुवार को चालान भेज दिया, जहां से सुरेश को जेल भेज दिया गया। घरवालों ने बताया कि शुक्रवार सुबह पुलिस ने उन्हें जेल में सुरेश के आत्महत्या करने की जानकारी दी।

पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिवारजन ने कोतवाल शिवाजी दुबे व सिपाही रोहित, विनीत व सनी कुमार पर कार्रवाई होने तक शव का पोस्टमार्टम न कराने की जिद पर अड़े रहे। एएसपी पवन गौतम, सीओ गोला और शहर कोतवाल मृतक के भाई व भतीजों को समझाते रहे और अधिकारियों ने तहरीर मिलने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, पोस्टमार्टम के बाद भी कार्रवाई न होने से नाराज घरवाले शव पोस्टमार्टम हाउस पर ही छोड़कर गांव लौट गए। बाद में पुलिस शव को अपनी सुपुर्दगी में लेकर गांव पहुंची।

मृतक के भतीजे रंजीत वर्मा ने बताया कि सीमा देवी की मौत के मामले में पुलिस हमारे घर के कई लोगों के नाम लिखकर ले गई थी। इसके बाद हम सभी को कोतवाली ले जाया गया। वहां नाम निकालने के लिए प्रति व्यक्ति पांच लाख रुपये मांगे गए। रंजीत ने बताया कि पांच लाख रुपये लेकर हम लोगों को तो जाने दिया गया, लेकिन मृतक चाचा सुरेश को अपनी कस्टडी में ही रखा। जेल अधीक्षक पीडी सलोनिया ने बताया कि बंदियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं। सुरेश शौचालय गया था, लेकिन वह काफी देर तक लौटकर नहीं आया। इस पर बैरक में तैनात सुरक्षाकर्मी ने शौचालय में जाकर देखा तो सुरेश वर्मा का शव शौचालय के एंगल से गमछे के फंदे से लटकता मिला। इस मामले में जेल वार्डन की लापरवाही मिलने पर उसे सस्पेंड कर दिया गया है।

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