कतर्नियाघाट में बाघों की गिनती में यूपी टॉप पर, 550 ट्रैप कैमरों से होगी गणना
भारत-नेपाल सीमा से सटा कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग बाघों के लिए एक अनुकूल आवास के रूप में उभरा है। लगातार संरक्षण प्रयासों के परिणामस्वरूप, 2026 की बाघ गणना में बहराइच जिला उत्तर प्रदेश में बाघों की संख्या के मामले में अग्रणी स्थान हासिल करने के लिए तैयार है। यह वृद्धि वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के अधिकारियों के लिए खुशी का स्रोत है।
551 वर्ग किलोमीटर में फैले इस प्रभाग में बाघों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। 2018 में 29 बाघों की गिनती की गई थी, जो 2022 में बढ़कर 59 हो गई। शावकों को पिछली गणनाओं में शामिल नहीं किया गया था, और उनके बड़े होने पर संख्या में और वृद्धि की उम्मीद है। प्रतिवर्ष 12 से 22 शावकों के जन्म की संभावना वन विभाग के लिए आशा की किरण है। बाघों की सटीक गणना के लिए जंगल में 275 स्थानों पर कुल 550 कैमरे लगाए गए हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि इस बार बाघों की संख्या 100 का आंकड़ा पार कर जाएगी।
बाघों की मेटिंग का समय आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर के बीच होता है, जिसके बाद बाघिन चार महीने के गर्भकाल के बाद शावकों को जन्म देती है। प्रदेश में बाघों की गणना तीन चरणों में पूरी की जाएगी, जिसमें पीलीभीत टाइगर रिजर्व, किशुनपुर सेंचुरी, कतर्नियाघाट, दुधवा टाइगर रिजर्व और रानीपुर अभयारण्य जैसे क्षेत्र शामिल होंगे।
कतर्नियाघाट में बाघों की पहचान उनके शरीर पर बनी धारियों से की जाती है, जिसके लिए रेंजरों को प्रशिक्षित किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों ने यहां 22 शावकों को भी देखा है, और उनकी सुरक्षा के लिए वनकर्मियों के साथ-साथ स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के जवान भी सक्रिय रूप से गश्त कर रहे हैं।
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