UP land use policy: योगी सरकार ने शहरी विकास के लिए उठाया बड़ा कदम, भू-उपयोग परिवर्तन नियम होंगे आसान
उत्तर प्रदेश के शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी के कारण अब बसावट के लिए जमीनें कम पड़ रही हैं। कानपुर, लखनऊ और गाजियाबाद जैसे बड़े शहरों के विस्तार को देखते हुए, राज्य सरकार ने भू-उपयोग परिवर्तन (land use conversion) के नियमों को सरल बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन ने एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को सुगम बनाना और इसकी दरों को कम करना है, ताकि शहरी विकास परियोजनाओं को गति मिल सके।
जटिल प्रक्रिया से अटके रहते हैं प्रोजेक्ट
वर्तमान में भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया बेहद जटिल है। डेवलपर्स और किसानों को इसके लिए महीनों तक प्राधिकरणों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्राधिकरण बोर्ड से संस्तुति मिलने के बाद भी प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबे समय तक लटके रहते हैं। इस देरी के कारण निर्माण की लागत कई गुना बढ़ जाती है, जिससे फ्लैट और प्लॉट की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। इसका सीधा असर आम खरीदारों पर पड़ता है, जिनके लिए घर खरीदना मुश्किल हो जाता है।
कानपुर में भी अटके कई प्रोजेक्ट
कानपुर में भी ऐसे कई उदाहरण हैं जहां भू-उपयोग परिवर्तन न होने के कारण महत्वपूर्ण परियोजनाएं ठप पड़ गईं। जेके ग्रुप का एक निजी पीएम आवास प्रोजेक्ट कई वर्षों तक शासन में अटका रहा। जरीब चौकी के पास की जमीन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होने के बावजूद, भू-उपयोग परिवर्तन की मंजूरी न मिलने से यह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका।
समिति कर रही है मंथन
शासन द्वारा गठित इस समिति की अध्यक्षता लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष कर रहे हैं। इसमें कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) के उपाध्यक्षों के साथ-साथ प्रदेश के मुख्य नगर नियोजक भी शामिल हैं। समिति की कई बैठकें हो चुकी हैं, जिसमें नियमों में बदलाव करके प्रक्रिया को आसान बनाने और दरों को संशोधित करने पर मंथन चल रहा है। केडीए के चीफ टाउन प्लानर मनोज कुमार ने बताया कि भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए नियम बनाने की तैयारी हो रही है।
कानपुर के मास्टर प्लान में विस्तार
कानपुर शहर के नए मास्टर प्लान में 9,105 हेक्टेयर नया शहरीकरण क्षेत्र जोड़ा गया है, जिससे कुल क्षेत्रफल 51,233 हेक्टेयर हो जाएगा। इसमें 41.50 प्रतिशत क्षेत्र आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित किया गया है। इस विस्तार को देखते हुए, भू-उपयोग परिवर्तन के नियमों का सरलीकरण शहरी विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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