बांग्लादेश में दो मौतें: पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंडों पर सवाल
बांग्लादेश में हाल ही में हुई दो अलग-अलग मौतों ने पश्चिमी देशों के कथित पक्षपात और दोहरे मापदंडों को उजागर किया है। जहाँ एक ओर, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने शेख़ हसीना सरकार के विरोधी रहे ओस्मान हादी की हत्या पर गहरा दुख और संवेदना व्यक्त की, वहीं दूसरी ओर, ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डाले गए हिंदू फैक्ट्री मजदूर दीपू चंद्र दास की मौत पर उनकी चुप्पी चिंताजनक रही।
ओस्मान हादी, जो जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान प्रमुखता से उभरे थे, की 18 दिसंबर को ढाका में नकाबपोश हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी, और सिंगापुर में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इसी दिन, मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य दीपू चंद्र दास को भीड़ ने ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला।
दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या
दीपू चंद्र दास, एक 27 वर्षीय कॉलेज स्नातक थे, जिन्होंने तीन साल पहले शादी की थी और उनकी डेढ़ साल की बेटी है। यह घटना बांग्लादेश के किसी कोने में नहीं, बल्कि मैमनसिंह जिले के भालुका में सार्वजनिक रूप से हुई। सैकड़ों लोगों ने दास के साथ भीड़ द्वारा की जा रही बर्बरता के वीडियो बनाए, जबकि उनके मृत शरीर को पेड़ से बांधकर आग के हवाले कर दिया गया।
पश्चिमी देशों की चुप्पी और मीडिया कवरेज
दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या पर कोई खास अंतरराष्ट्रीय आक्रोश नहीं देखा गया। भारत के अलावा किसी भी देश ने विरोध नहीं किया। पश्चिमी मीडिया, जो अक्सर अल्पसंख्यक अधिकारों का पैरोकार बनता है, इस घटना पर काफी हद तक खामोश रहा। न्यूयॉर्क टाइम्स ने जरूर इस घटना पर रिपोर्ट की, लेकिन उसने इसे दक्षिण एशिया क्षेत्र में धार्मिक असहिष्णुता के व्यापक पैटर्न से जोड़ दिया। रिपोर्ट में भारत में मुसलमानों पर हमलों का भी जिक्र किया गया, जिससे घटना के मूल मुद्दे को संतुलित करने का प्रयास किया गया।
राजनीतिक और कूटनीतिक प्रतिक्रिया
इसके विपरीत, ओस्मान हादी की मौत पर अमेरिका, यूरोपीय संघ, जर्मनी और फ्रांस के दूतावासों ने न केवल आधिकारिक बयान जारी किए, बल्कि कुछ देशों ने अपने राष्ट्रीय ध्वज भी आधे झुका दिए। यह कूटनीतिक रूप से असामान्य माना गया, खासकर तब जब हादी के इस्लामिस्ट समूह ‘इंकलाब मंच’ से संबंध थे, जिसका एजेंडा बांग्लादेश को इस्लामीकरण की ओर ले जाना है। पश्चिमी देशों की यह प्रतिक्रिया उन देशों के लिए चिंता का विषय है जो खुद को मानवाधिकारों और लोकतंत्र के पैरोकार मानते हैं, लेकिन एक अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य की बर्बर हत्या पर चुप्पी साधे रहते हैं।
तारीक रहमान का ढाका में बड़ा भाषण: “मेरे पास एक योजना है”, मार्टिन लूथर किंग जूनियर को किया याद
बांग्लादेश सभी धर्मों का है, तारिक रहमान की शांति अपील | Bangladesh peace appeal
बांग्लादेश में लोकतंत्र की मांग: पत्रकार ने कहा ‘मजहबी मुल्क नहीं, हमें चाहिए free and fair elections’
तारीक रहमान की बांग्लादेश वापसी: भारत के लिए क्यों अच्छी खबर, जानिए पूरा मामला
बांग्लादेश में हिंदू व्यक्ति की भीड़ द्वारा हत्या, पुलिस ने कहा – उगाही का मामला
तारीक रहमान का ‘हवा भवन’ राज: बांग्लादेश की राजनीति में भ्रष्टाचार और हिंसा का काला अध्याय – Tarique Rahman
बांग्लादेश की राजनीति में हलचल: तस्लीमा नसरीन की वापसी की अटकलें, देश में तनाव का माहौल
ढाका में धमाका, एक की मौत: त dukkhक की वापसी से पहले बढ़ी राजनीतिक हिंसा
