ट्रंप की नई सख्ती: H-1B वीजा संकट से हजारों भारतीयों की नौकरी दांव पर, सोशल मीडिया जांच से बढ़ी मुसीबत
अमेरिका में काम करने वाले हजारों भारतीय H-1B वीजा धारकों के लिए एक आम यात्रा अब बड़ी मुसीबत बन गई है। जो लोग शादी, छुट्टी, पारिवारिक जरूरत या वीजा स्टैम्पिंग के लिए भारत आए थे, वे अब महीनों तक यहीं फंसने को मजबूर हैं। वजह है ट्रंप प्रशासन का एक नया नियम, जिसने बिना चेतावनी सब कुछ बदल दिया।
H-1B वीजा धारक आमतौर पर भारत आकर अमेरिकी दूतावास में वीजा स्टैम्पिंग कराकर वापस लौटते हैं। कई लोगों का वर्क परमिट (H-1B स्टेटस) वैध था, लेकिन पासपोर्ट में लगा एंट्री वीजा खत्म हो चुका था। यह प्रक्रिया आम तौर पर कुछ दिनों की होती थी।
लेकिन इस बार हालात अलग हैं। 3 दिसंबर को अमेरिकी विदेश विभाग ने नया नियम जारी किया, जो 15 दिसंबर से लागू होगा। इसके तहत सभी H-1B और H-4 वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया जांच अनिवार्य कर दी गई है।
इस नए नियम के चलते भारत के बड़े अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों खासकर हैदराबाद और चेन्नई में वीजा इंटरव्यू की रफ्तार बहुत धीमी हो गई है। दिसंबर 2025 के लिए तय कई अपॉइंटमेंट रद कर दिए गए हैं। अब इन अपॉइंटमेंट्स को मार्च 2026 से लेकर जून 2026 तक खिसकाया जा रहा है। अमेरिकी दूतावास ने साफ कहा है कि पुराने अपॉइंटमेंट की तारीख पर पहुंचने से वीजा नहीं मिलेगा।
नए नियम के अनुसार, वीजा आवेदकों को अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स पब्लिक करने होंगे। अमेरिकी अधिकारी आवेदक की ऑनलाइन गतिविधियों को गहराई से जांचेंगे। इसमें पोस्ट, कमेंट, लाइक, शेयर और इंटरनेट पर मौजूद अन्य जानकारी शामिल होगी। अधिकारियों को यह देखने का अधिकार होगा कि कहीं आवेदक की पोस्ट अमेरिका, उसकी संस्थाओं या नागरिकों के खिलाफ तो नहीं है।
सोशल मीडिया पर फंसे लोगों की चिंता साफ दिख रही है। कोई नौकरी खोने से डर रहा है, तो कोई अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर परेशान है। एक व्यक्ति ने लिखा, “मेरा 18 दिसंबर का अपॉइंटमेंट मार्च 2026 कर दिया गया। जनवरी में अमेरिका लौटना था, मेरे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे।”
इमिग्रेशन वकील एलेन फ्रीमैन ने चेतावनी दी कि कई H-1B कर्मचारी अपनी नौकरी खो सकते हैं। कई कंपनियां 5-6 महीने तक इंतजार नहीं कर सकतीं और कई मामलों में भारत से रिमोट वर्क कानूनी तौर पर संभव नहीं होता। लोगों ने अमेरिका में घर का किराया, कार लोन और बिल छोड़ रखे हैं। इतनी लंबी देरी का सीधा असर परिवारों और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
H-1B वीजा पाने वालों में करीब 70% भारतीय हैं। वित्त वर्ष 2024 में भारत को करीब 80,500 नए H-1B वीजा मिले, जबकि चीन को करीब 19,600। इसलिए यह सख्ती सबसे ज्यादा भारतीय आईटी पेशेवरों को प्रभावित कर रही है।
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