“title”: “आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा: बरेली में अरबों की उगाही, गरीबों का हक मारा गया”,
“subtitle”: “फर्जी दस्तावेजों से बने लाखों कार्ड, साचीज ने एक अस्पताल निलंबित किया, पांच को नोटिस।”,
“summary”: “बरेली में आयुष्मान भारत योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। अपात्र लोगों के फर्जी दस्तावेजों और गलत मोबाइल नंबरों से आयुष्मान कार्ड बनाए गए, जिससे अरबों रुपये की उगाही हुई। साचीज ने एक अस्पताल को निलंबित कर पांच अन्य को नोटिस जारी किए हैं। इस धोखाधड़ी के कारण हजारों गरीब मुफ्त इलाज के हक से वंचित हो गए हैं, जबकि पात्र लाभार्थी कार्ड के लिए भटक रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।”,
“content”: “बरेली में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घोटाले में फर्जी दस्तावेजों और गलत मोबाइल नंबरों के इस्तेमाल से अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए, जिससे अरबों रुपये की अवैध उगाही की गई। यह खुलासा तब हुआ जब स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) ने कई अस्पतालों की गड़बड़ी पकड़ी और एक को निलंबित कर दिया।nnइस फर्जीवाड़े ने हजारों गरीब और जरूरतमंद लोगों से मुफ्त इलाज का उनका हक छीन लिया है। जहां एक ओर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग आज भी आयुष्मान कार्ड के लिए दर-दर भटक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संगठित गिरोह ने अपात्र व्यक्तियों के कार्ड बनवाकर योजना का दुरुपयोग किया। जिले में 14 लाख 77 हजार से अधिक लोगों को सर्वे के बाद योजना में शामिल किया गया था, जिनमें से 12 लाख से अधिक लोगों के कार्ड बनने की एंट्री है, लेकिन लगभग 20 प्रतिशत पात्र लाभार्थियों के कार्ड अब तक नहीं बन पाए हैं।nnसाचीज की जांच में यह बात सामने आई है कि कई निजी अस्पताल संचालकों ने फर्जी बिल और वाउचर लगाकर इस योजना से करोड़ों रुपये लूटे हैं। इस बड़े खुलासे के बाद साचीज ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक अस्पताल को अपनी सूची से निलंबित कर दिया है, जबकि पांच अन्य अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन अस्पतालों के जवाब से संतुष्ट न होने पर उन पर भी कड़ी कार्रवाई होना तय है। सूत्रों के मुताबिक, यह खेल केवल चिह्नित अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई छोटे-बड़े अस्पताल भी इस घोटाले में शामिल हो सकते हैं।nnइस पूरे फर्जीवाड़े में एक संगठित गिरोह के काम करने का संदेह है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। आरोप है कि दलाल 15-20 हजार रुपये लेकर बिना किसी उचित प्रक्रिया के कुछ ही दिनों में आयुष्मान कार्ड बनवा देते हैं। नवाबगंज के दिनेश कुमार जैसे कई पात्र लाभार्थी अपनी आपबीती सुनाते हैं, जिनकी पत्नी गुर्दे की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और इलाज के लिए उन्हें अपनी कृषि भूमि तक बेचनी पड़ी, लेकिन आयुष्मान कार्ड अब तक नहीं बन पाया। इसी तरह मीरगंज के प्रवीण कुमार ने भी योजना को लेकर शिकायत की है।nnअपर मुख्य चिकित्साधिकारी व नोडल अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन के तहत केवल एसईसीसी 2011 के डेटाबेस में शामिल लोगों के ही कार्ड बनाए जा सकते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के पास लगातार ऐसी शिकायतें आ रही हैं, जिनमें पात्र और मजबूर
