इटावा जनपद में तेज रफ्तार वाहनों का कहर लगातार जारी है, जिसने एक्सप्रेस-वे से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों तक कई जिंदगियां छीन ली हैं। यातायात विभाग द्वारा लगातार चालान और जुर्माने की कार्रवाई के बावजूद वाहन...
इटावा जनपद में तेज रफ्तार वाहनों का कहर लगातार जारी है, जिसने एक्सप्रेस-वे से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों तक कई जिंदगियां छीन ली हैं। यातायात विभाग द्वारा लगातार चालान और जुर्माने की कार्रवाई के बावजूद वाहन चालक ओवरस्पीडिंग से बाज नहीं आ रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप सड़क हादसों में कमी आने के बजाय लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। यह स्थिति चिंताजनक है और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
हाल ही में जनपद में हुई दो बड़ी दुर्घटनाएं इसकी भयावहता को दर्शाती हैं। रविवार को जसवंतनगर थाना क्षेत्र में आगरा-कानपुर नेशनल हाईवे पर ग्राम जौनई के पास फिरोजाबाद से बहन के घर से लौट रहे अजीतमल, औरैया निवासी बाइक सवार युवक गोविंद को एक तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसी प्रकार, बकेवर क्षेत्र के मेहंदीपुर के पास देर शाम तेज गति के कारण एक बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरी। इस हादसे में अंदावा मड़ैया मलहान के रहने वाले 18 वर्षीय युवक मुंशीलाल की जान चली गई, जबकि उसके साथ सवार दो दोस्त सुबोध और हरेन्द्र गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया।
यातायात पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, जनपद में वर्ष 2025 में 1 जनवरी से 15 नवंबर तक कुल 52,815 वाहनों पर यातायात नियमों का उल्लंघन, हेलमेट व सीटबेल्ट का प्रयोग न करने और तेज गति से वाहन चलाने के आरोप में चालानी कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई से विभाग को लगभग 10 करोड़ 3 लाख 70 हजार 500 रुपये का राजस्व भी प्राप्त हुआ है। यह संख्या वर्ष 2024 में की गई कार्रवाई की अपेक्षा लगभग दस हजार अधिक है। इन चालानों में 1,967 चालान विशेष रूप से तेज गति से वाहन चलाने के लिए किए गए थे, फिर भी वाहन चालकों के रवैये में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।
राष्ट्रीय व जिला राज्य मार्गों के अलावा, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर भी ओवरस्पीडिंग एक गंभीर समस्या बनी हुई है। जनपद से गुजरने वाले इन दोनों एक्सप्रेस-वे पर यातायात नियमों का उल्लंघन करते हुए अधिक रफ्तार में वाहन चलाने के कारण वित्तीय वर्ष 2024 में जहां 17,599 चालान हुए थे, वहीं वर्ष 2025 में नवंबर माह तक यह आंकड़ा बढ़कर 21,350 हो चुका है। इन आंकड़ों के बावजूद, हादसों में मौतों और घायलों की संख्या घटने के बजाय बढ़ रही है, जो यह दर्शाता है कि केवल चालान से ही समस्या का समाधान संभव नहीं है। यातायात नियमों के प्रति जागरूकता और कठोर प्रवर्तन की आवश्यकता है ताकि इन जानलेवा हादसों पर लगाम लगाई जा सके।