“title”: “इटावा में दीपावली पर धूम, 5 करोड़ के पटाखे बिके; बाजारों में दिखी बंपर रौनक”,
“subtitle”: “जीएसटी में छूट से सस्ता हुआ आतिशबाजी बाजार, युवाओं और बच्चों ने दिल खोलकर की खरीदारी”,
“summary”: “इटावा में दीपावली का पर्व खरीदारी के नए रिकॉर्ड लेकर आया। इस बार लोगों ने 5 करोड़ रुपये से अधिक के पटाखे खरीदे, जो पिछले कुछ सालों की तुलना में काफी अधिक है। जीएसटी में छूट के कारण पटाखों के दाम सस्ते होने से बाजार में जबरदस्त उछाल देखा गया। मिट्टी के दीयों और मूर्तियों की बिक्री भी खूब हुई, जिससे व्यापारियों के चेहरे खिल उठे। हालांकि, कुछ स्थानों पर नियमों की अनदेखी कर भी पटाखों की बिक्री होती रही।”,
“content”: “इटावा में दीपावली का पर्व इस बार खरीदारी के नए रिकॉर्ड लेकर आया। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, लोगों ने दिल खोलकर खरीदारी की, जिससे बाजारों में अद्भुत रौनक और उत्साह देखने को मिला। विशेष रूप से, आतिशबाजी बाजार में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया, जहां 5 करोड़ रुपये से अधिक के पटाखे बिके। मिट्टी के दीयों और मूर्तियों की बिक्री ने भी खूब गति पकड़ी, जिससे व्यापारियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने भी कड़े इंतजाम किए थे।nnइस दीपावली पर पटाखों की बिक्री ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। शहर के नुमाइश ग्राउंड में लगे अस्थाई आतिशबाजी बाजार से लेकर ग्वालियर रोड, विचारपुरा और लुहन्ना स्थित थोक दुकानों तक, हर जगह खरीददारों की भीड़ उमड़ी रही। यही नहीं, शहर के विभिन्न चौराहों, तिराहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी छोटे-छोटे दुकानदारों ने चारपाई व फड़ों पर पटाखे सजाकर बेचे, हालांकि इस दौरान कुछ स्थानों पर नियमों की अनदेखी भी हुई। पटाखों की बिक्री का यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा।nnपटाखों की खरीद-फरोख्त में युवाओं से लेकर युवतियां और बच्चे भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते नजर आए। युवाओं ने जहां स्काई शॉट्स, हैंडशॉट्स, लैला मजनू और रॉकेट जैसे बड़े पटाखे पसंद किए, वहीं युवतियों और बच्चों ने अनार, चरखी, रंग-बिरंगी फुलझड़ी के साथ लांबा और पेंटा जैसे आसमानी शॉट्स की जमकर खरीदारी की। यह दर्शाता है कि आतिशबाजी का क्रेज हर उम्र के लोगों में बरकरार है।nnपिछले कुछ सालों में पटाखों पर प्रतिबंध और कड़े नियमों के चलते आतिशबाजी बाजार में जो नरमी देखी जा रही थी, वह इस बार पूरी तरह से गायब रही। इसका एक प्रमुख कारण जीएसटी में मिली छूट थी, जिससे पटाखों के दाम अपेक्षाकृत सस्ते हो गए। सस्ते दामों ने ग्राहकों को अधिक खरीदारी के लिए प्रेरित किया, और नतीजतन, पटाखा बाजार खूब गर्म रहा।nnप्रशासन ने शहर में आबादी से दूर एक महीने पहले ही पटाखों की बिक्री की अनुमति दे दी
