0

मुन्नार से भी हसीन है यह जगह, ‘केरल का कश्मीर’ कहलाता है साउथ इंडिया का यह हिल स्टेशन!

By Dec 10, 2025

जब हम कश्मीर का नाम लेते हैं, तो दिमाग में बर्फीली वादियों और सेब के बागानों की तस्वीर आती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि साउथ इंडिया में भी एक ऐसी जगह है जिसे ‘केरल का कश्मीर’ कहा जाता है?

अगर आपको लगता है कि आपने केरल का हर खूबसूरत कोना देख लिया है, तो शायद आप कंथलूर से अब तक अनजान हों। मुन्नार की भीड़-भाड़ से दूर, यह शांत और प्यारा-सा गांव किसी छिपे हुए जादू से कम नहीं है। मुन्नार से थोड़ी ही दूरी पर स्थित, यह ऊंचाई वाला गांव सर्दियों की छुट्टियों के लिए एकदम सही जगह है। यहां की ताजी पहाड़ी हवा, फलों से लदे बगीचे, हरी-भरी पहाड़ियां और शांति आपका मन मोह लेगी।

इस जगह की सबसे खास बात यह है कि पूरे केरल में केवल यही वह जगह है जहां सेब उगाए जाते हैं। यही कारण है कि कांथलूर को ‘केरल का कश्मीर’ भी कहा जाता है।

कंथलूर में आज भी पुराने जमाने की झलक देखने को मिलती है। यहां एक ऐसी अनोखी दुकान है जो 1962 से ‘वस्तु-विनिमय प्रणाली’ (Barter System) पर चल रही है। जी हां, यह कोई कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है। यहां स्थानीय लोग अपने खेत की उपज जैसे अदरक, लहसुन, सरसों, धनिया या बीन्स लेकर आते हैं और उसके बदले में चावल या घर की अन्य जरूरी चीजें ले जाते हैं। लगभग 160 परिवार इस दुकान पर निर्भर हैं, जो इसे केरल की सबसे पुरानी और दिल को छू लेने वाली परंपराओं में से एक बनाता है।

कंथलूर में प्रकृति का एक दुर्लभ चमत्कार भी देखने को मिलता है। हर 12 साल में यहां की पहाड़ियां पूरी तरह से नीली हो जाती हैं, जब नीलकुरिंजी के फूल खिलते हैं। यह नजारा इतना अद्भुत होता है कि दुनिया भर से टूरिस्ट इसे देखने आते हैं। पिछली बार ये फूल 2018 में खिले थे, इसलिए अगर आप इसे चूक गए हैं, तो 2030 के लिए अपनी योजना बनाना शुरू कर दें। एक दिलचस्प तथ्य यह है कि यहां के स्थानीय आदिवासी समुदाय कभी अपनी उम्र का हिसाब इन्हीं फूलों के मौसम से लगाते थे, यानी एक फूल का मौसम 12 साल की उम्र के बराबर माना जाता था।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें