उत्तराखंड में बिल्डरों की मनमानी पर लगेगी रोक, निवेशकों की सुरक्षा के लिए नई नियमावली लागू करेगी सरकार; uttarakhand real estate news
उत्तराखंड सरकार ने नए साल के साथ ही अवैध निर्माण और भूमाफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है। राजधानी देहरादून, जहां वर्षों से अवैध कॉलोनियों, नदी किनारे निर्माण और सरकारी भूमि पर कब्जों ने शहर की रफ्तार और पर्यावरण दोनों को बिगाड़ा है, अब सख्त कार्रवाई का केंद्र बन गया है। सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका की संयुक्त सख्ती से यह उम्मीद जगी है कि विकास के नाम पर हो रहे बेतरतीब कंक्रीटीकरण पर अब वास्तविक लगाम लगेगी।
प्रदेश में निवेश के नाम पर रकम लेकर प्रोजेक्ट अधूरे छोड़ने, तय वादों से मुकरने व ग्राहकों को लूटकर फरार होने वाले बिल्डरों पर अब सरकार सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन व विकास प्राधिकरण ने बिल्डर गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए एक कड़ी और पारदर्शी नियमावली को लागू करने की तैयारी कर ली है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगेगी और निवेशकों को सुरक्षा भी मिलेगी।
गुजरते चार-पांच वर्षों में विकास प्राधिकरण एवं पुलिस के पास ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें बिल्डरों ने करोड़ों रुपये लेकर आवासीय प्रोजेक्ट शुरू तो किए, लेकिन बीच में ही निर्माण रोक दिया। कई बिल्डर तो फरार भी हो गए हैं, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे कई प्रोजेक्ट अधर में हैं, जबकि खरीदार बैंक की किश्त और किराया दोनों का बोझ झेल रहे हैं। बढ़ती शिकायतों एवं निवेशकों को होने वाली परेशानी के मद्देनजर शासन के निर्देशन में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) नई नियमावली पर काम शुरू कर चुका है।
नई नियमावली में निवेशकों का पैसा एस्क्रो अकाउंट में जमा होगा व निर्माण की प्रगति के अनुसार बिल्डरों को यह पैसा किश्तों में जारी होगा। एस्क्रो अकाउंट एक ऐसा बैंक अकाउंट होता है, जहां दो या दो से अधिक पक्षों के बीच सौदा पूरा होने तक धनराशि किसी विश्वसनीय तृतीय पक्ष द्वारा सुरक्षित रखी जाती है। समस्त आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद धनराशि विक्रेता को भुगतान कर दी जाती है। यदि विक्रेता आवश्यकता पूरी नहीं करता है, तो धनराशि उसी व्यक्ति को या खरीदार को वापस कर दी जाती है। यह व्यवस्था दोनों पक्षों को संभावित धोखाधड़ी से बचाती है।
देहरादून में अवैध निर्माण और कंक्रीट माफिया पर कार्रवाई केवल प्रतीकात्मक नहीं रहेगी। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण व जिला प्रशासन ने दर्जनों स्थानों पर निरीक्षण कर सैकड़ों अवैध निर्माणों को चिह्नित किया है। इनमें बिना मानचित्र स्वीकृति बने भवन, कृषि भूमि पर विकसित कॉलोनियां और नदी-नालों के बाढ़ क्षेत्र में बने पक्के ढांचे शामिल हैं। एमडीडीए के अनुसार, सहस्रधारा, रायपुर, डोईवाला, राजपुर रोड और रिस्पना व बिंदाल नदी किनारे के क्षेत्रों में वर्षों से चले आ रहे मामलों की फाइलें दोबारा खोली गई हैं। कई बड़े बिल्डरों व डेवलपरों की सूची तैयार की गई है, जिन पर आने वाले दिनों में सीलिंग, ध्वस्तीकरण और आपराधिक मुकदमे दर्ज हो सकते हैं। प्राधिकरण ने साफ किया है कि अब केवल नोटिस जारी कर मामले ठंडे बस्ते में नहीं डाले जाएंगे। जोर इस बात पर भी है कि अवैध निर्माण रोकने के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय की जाए।
