ठंड में ठिठुरते बच्चे: आठ माह बाद भी नहीं मिली पोशाक-स्वेटर की राशि
महागामा प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत हजारों बच्चे भीषण ठंड में ठिठुरने को विवश हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि विभाग की ओर से पिछले आठ महीनों से पोशाक और स्वेटर खरीदने के लिए राशि जारी नहीं की गई है। दिसंबर माह की शुरुआत के साथ ही तापमान लगातार गिर रहा है, जिससे ठंड का प्रकोप बढ़ गया है।nnइस कड़ाके की ठंड में भी बच्चों को न तो गर्म स्वेटर मिल पाया है और न ही उन्हें नई पोशाक नसीब हुई है। नतीजतन, कई बच्चे पुराने, फटेहाल कपड़ों में ही स्कूल पहुँच रहे हैं। राजकीयकृत उत्क्रमित उच्च विद्यालय डालावर में भी बुधवार को कई बच्चे ठंड से कांपते हुए दिखे, जिनमें से अधिकतर ने स्वेटर नहीं पहन रखा था।nnबता दें कि कक्षा एक और दो के बच्चों के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति को स्वेटर और पोशाक क्रय करनी होती है, जबकि कक्षा तीन से आठ तक के बच्चों को स्वयं इन्हें खरीदना होता है। हालांकि, निचले तबके के बच्चों के लिए राशि अब तक प्रबंधन समितियों को उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस कारण वे बच्चों को आवश्यक सामग्री नहीं दे पा रहे हैं।nnमहागामा प्रखंड क्षेत्र में कुल 171 सरकारी विद्यालयों में 38 हजार 429 बच्चे नामांकित हैं। इन सभी को अब तक स्वेटर और पोशाक की राशि नहीं मिली है। सरकार शिक्षा के क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि छात्रों को मूलभूत सुविधाएं भी समय पर नहीं मिल पा रही हैं।nnसरकारी नियमानुसार, प्राथमिक और पंचम वर्ग के बच्चों को दो सेट पोशाक, एक स्वेटर और जूता-मोजा के लिए 600 रुपये दिए जाते हैं। इसमें पोशाक के लिए 350 रुपये, जूता-मोजा के लिए 100 रुपये और स्वेटर के लिए 150 रुपये निर्धारित हैं। वहीं, कक्षा छह से आठ तक के बच्चों के लिए यह राशि 760 रुपये है, जिसमें पोशाक के लिए 400 रुपये, जूता-मौजा के लिए 160 रुपये और स्वेटर के लिए 200 रुपये शामिल हैं।nnराशि के अभाव में बच्चों को ठंड से बचाव के लिए आवश्यक सामग्री नहीं मिल पा रही है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में ठंड बढ़ने के साथ ही बच्चों की परेशानी और भी बढ़ सकती है। अभिभावकों में इस देरी को लेकर काफी नाराजगी और चिंता है।”
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