कवि सम्मेलन में महंगाई पर तंज, पेट्रोल-गैस को बताया ‘खजाना’
लखनऊ के पुनर्वास विश्वविद्यालय में ‘समकालीन समय, समाज और साहित्यः विमर्श, संवेदना, दिव्यांगता पुनर्वास एवं सामाजिक दायित्व’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में कवि पंकज प्रसून ने महंगाई के मुद्दे पर अपनी बेबाक प्रस्तुति दी। उन्होंने पेट्रोल और गैस सिलेंडर की कीमतों को ‘खजाना’ बताते हुए श्रोताओं को हंसाया। प्रसून ने पढ़ा, “पेट्रोल पंप पर मेरी टंकी जो फुल हुई, ऐसा लगा कि जख्म पुराना हो सिल गया… तिजोरी से भी ज़्यादा, अब हिफ़ाज़त इसकी करनी है, सिलेंडर क्या मिला, जैसे कि ख़ज़ाना हो मिल गया…” उनकी इन पंक्तियों पर पूरा पंडाल तालियों और ठहाकों से गूंज उठा।
इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे कवि कालीचरण स्नेही ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। वहीं, शिखा श्रीवास्तव और अशोक झंझटी ने भी समसामयिक विषयों पर अपनी कविताओं से श्रोताओं को प्रभावित किया।
कार्यक्रम में राज्य दिव्यांगजन आयुक्त प्रो. हिमांशु शेखर झा ने कहा कि साहित्य समाज में संवेदनशीलता फैलाने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने साहित्यकारों और शिक्षाविदों से आह्वान किया कि वे अपने लेखन के ज़रिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री विद्या विन्दु सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने विचार साझा किए। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में दिव्यांगता के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना और सामाजिक दायित्वों पर विमर्श करना था।
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