उत्तरकाशी में भालू का आतंक जारी, रैथल गांव में युवक पर जानलेवा हमला
उत्तरकाशी जनपद में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला रैथल गांव के मथाली तोक से सामने आया है, जहां गुरुवार सुबह एक भालू ने 38 वर्षीय युवक हरीश पर उस वक्त हमला कर दिया जब वह अपने घर के पीछे बने पानी के टैंक को ठीक करने गया था। घात लगाए बैठे जंगली जानवर ने युवक पर झपटकर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।
युवक की चीख पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए किसी तरह युवक को भालू के चंगुल से बचाया। आनन-फानन में 108 एंबुलेंस की मदद से घायल हरीश को नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भटवाड़ी ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। हालांकि, हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उसे हायर सेंटर देहरादून भेज दिया है। इस हमले में युवक के जबड़े सहित चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं।
घटनास्थल के पास रहने वाले ग्रामीणों में इस हमले को लेकर गहरा आक्रोश और भय व्याप्त है। नटीण गांव के पूर्व प्रधान महेंद्र पोखरियाल ने चिंता जताते हुए कहा कि पहले भालू रात के अंधेरे में हमला करते थे, लेकिन अब वे दिनदहाड़े भी हमलावर हो रहे हैं, जो बेहद खतरनाक संकेत है। उन्होंने सरकार से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन हो रहे ऐसे हमलों से उनकी जान-माल की सुरक्षा खतरे में है। उन्होंने प्रदेश सरकार से प्रभावित गांवों में भालुओं को भगाने के लिए तत्काल प्रभाव से एनाइडर साइरन जैसे सुरक्षा उपकरण लगाने की मांग की है। उनका मानना है कि यह कदम मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
इस बीच, जिलाधिकारी उत्तरकाशी प्रशांत आर्य ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी पांचों वन प्रभागों को एनाइडर साइरन आदि की खरीद के लिए बजट आवंटित कर दिया गया है। साथ ही, सभी वन उप-संरक्षकों (डीएफओ) को भालू और गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों को जागरूक करने और रात्रि गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
