उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवा को नई उड़ान: 1300 डॉक्टर-नर्स समेत बंपर भर्ती
उत्तराखंड सरकार राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति देने और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए एक बड़े भर्ती अभियान में जुट गई है। इसी कड़ी में, चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने घोषणा की है कि राज्य में शीघ्र ही 1300 नए स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी, जिनमें डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी, एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife) और सीएचओ (Community Health Officer) जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। देहरादून स्थित चंदर नगर में चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में आयोजित एक कार्यक्रम में मंत्री ने कुछ चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए, साथ ही उन्हें निष्ठा और सेवा भाव से कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
मंत्री डॉ. रावत ने बताया कि इन 1300 पदों में 287 डॉक्टर, 690 नर्सिंग अधिकारी, 180 एएनएम और 120 सीएचओ शामिल हैं। इसके अलावा, फार्मेसिस्ट की नियुक्ति भी अब वर्षवार प्रणाली के आधार पर की जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले पौने चार वर्षों में राज्य सरकार ने 26 हजार युवाओं को रोजगार दिया है, जिसमें से लगभग 21 हजार नियुक्तियां स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग में ही की गई हैं। यह सरकार की युवाओं को रोजगार देने और प्रदेश में योग्य मानव संसाधन की कमी को दूर करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित 28 नर्सिंग अधिकारियों, 14 सीएमएसडी टेक्नीशियन, 6 एसोसिएट प्रोफेसर (नर्सिंग) और 1 प्रोफेसर (नर्सिंग) को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन नियुक्तियों से राजकीय मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध चिकित्सालयों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी और नर्सिंग कॉलेजों में नई शिक्षकों की नियुक्ति से छात्र-छात्राओं को आधुनिक संसाधनों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और प्रशिक्षण का अवसर प्राप्त होगा। अब तक 1248 नर्सिंग अधिकारी राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नियुक्त किए जा चुके हैं, जबकि 587 पदों के लिए अधियाचन चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेजा गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए हैं। मंत्री डॉ. रावत ने घोषणा की कि राज्य के सभी अस्पतालों में 1 दिसंबर से बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य कर दी जाएगी। इसकी निगरानी न केवल मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) स्तर पर बल्कि सीधे मंत्री कार्यालय से भी की जाएगी। इसके अतिरिक्त, बांडधारी चिकित्सकों के लिए पीजी (Post Graduation) संबंधी नियमों में बदलाव किया गया है; अब उन्हें तीन साल की सेवा के बाद पीजी की अनुमति मिलेगी, जबकि सरकारी नौकरी ज्वाइन करने वाले मेडिकल अफसरों के लिए दो साल की अनिवार्य सेवा अवधि निर्धारित की गई है। एक सप्ताह से अधिक समय तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले बांडधारी डॉक्टरों के खिलाफ बांड उल्लंघन की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा और अधोसंरचना के क्षेत्र में भी सरकार सक्रिय है। मंत्री ने स्टेट कॉलेज ऑफ नर्सिंग, देहरादून में 456.15 लाख रुपये की लागत से निर्मित आधुनिक व्याख्यान कक्षों और लैब का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि सरकार नर्सिंग शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए लगातार आधुनिक संसाधन और प्रशिक्षित संकाय उपलब्ध करा रही है, ताकि गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा सुनिश्चित हो सके। इस दौरान चिकित्सा शिक्षा निदेशक डा. अजय आर्य समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री ने दिल्ली बम ब्लास्ट प्रकरण में कुछ डॉक्टरों के नाम सामने आने पर चिंता भी व्यक्त की और चिकित्सा शिक्षा निदेशक को इस विषय पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए, ताकि चिकित्सा पेशे की गरिमा बनी रहे।
