उत्तराखंड में बिजली की मांग और आपूर्ति बराबर, औद्योगिक क्षेत्रों में निर्बाध आपूर्ति
देहरादून: उत्तराखंड में बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच का अंतर समाप्त हो गया है, जिससे राज्य में बिजली की आपूर्ति की स्थिति काफी हद तक संतुलित हो गई है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, राज्य की कुल बिजली मांग 40.91 मिलियन यूनिट दर्ज की गई, जबकि उपलब्धता 40.77 मिलियन यूनिट रही, जो लगभग बराबरी की स्थिति को दर्शाता है।
ऊर्जा निगम (यूपीसीएल) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य ने इस अवधि में 9.07 मिलियन यूनिट बिजली का स्वयं उत्पादन किया। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय क्षेत्र से 13.25 मिलियन यूनिट बिजली प्राप्त हुई, जिससे राज्य को कुल 22.32 मिलियन यूनिट बिजली मिली। अन्य स्रोतों से भी बिजली की आपूर्ति सुचारू रही। बिजली खरीद और रिटर्न बैंकिंग के माध्यम से 14.36 मिलियन यूनिट, जबकि अन्य स्रोतों से 4.10 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति हुई। इस प्रकार, अन्य माध्यमों से कुल 18.45 मिलियन यूनिट बिजली प्राप्त हुई, जिसने कुल उपलब्धता को मजबूत किया।
इस संतुलित स्थिति का प्रत्यक्ष लाभ उपभोक्ताओं को मिल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अधिकांश क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की बिजली कटौती नहीं की गई। केवल हरिद्वार के ग्रामीण क्षेत्र में एक घंटे 15 मिनट की पूर्व-निर्धारित रोस्टरिंग लागू की गई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पर्वतीय क्षेत्रों, स्टील फर्नेस इकाइयों और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों में रोस्टरिंग पूरी तरह से शून्य रही, जिससे इन क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हुई। यह औद्योगिक उत्पादन के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि बिजली की निर्बाध आपूर्ति उत्पादन क्षमता बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
दिनभर की मांग और उपलब्धता के ग्राफ का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि सुबह और शाम के पीक आवर्स में मांग में थोड़ी वृद्धि हुई, लेकिन बिजली की उपलब्धता पूरे समय संतुलित बनी रही। किसी भी घंटे में बिजली की बड़ी कमी नहीं आई। ट्रांसमिशन नेटवर्क में भी पूरे दिन कोई तकनीकी समस्या उत्पन्न नहीं हुई, जिससे बिजली आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रही। यह स्थिति राज्य के ऊर्जा प्रबंधन की दक्षता को दर्शाती है, खासकर जब मौसम में बदलाव के साथ बिजली की मांग में उतार-चढ़ाव आता है।
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