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उत्तराखंड में 500 मेगावाट बिजली खरीद पर हंगामा: उपभोक्ता हित में है या बोझ?

By Oct 30, 2025

देहरादून। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) द्वारा 500 मेगावाट मध्यम अवधि (मिड टर्म) बिजली खरीदने की तैयारी पर राज्य में गर्मागर्म बहस छिड़ गई है। यूपीसीएल आज उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के समक्ष इन सवालों के जवाब देगा और यह स्पष्ट करेगा कि यह खरीद उपभोक्ताओं के हित में कैसे है। यह करार चार से पांच साल के लिए निर्धारित दरों पर बिजली खरीदने की अनुमति देगा, जिसका उद्देश्य राज्य की बिजली आपूर्ति को स्थिर और विश्वसनीय बनाना है।

यूपीसीएल का तर्क है कि इस करार से बिजली आपूर्ति की स्थिरता और विश्वसनीयता बढ़ेगी, खासकर उन महीनों में जब बिजली की मांग अपने चरम पर होती है। यूपीसीएल के एमडी अनिल यादव ने कहा, ‘मिड टर्म करार बिजली की जरूरत के लिहाज से उपयोगी है। अभी बाहर से बिजली खरीदने पर कई बार मनमानी कीमत देकर भी बिजली नहीं मिलती। इसलिए बिजली की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए यह करार जरूरी है। बिजली मिलेगी तभी उद्योगों को दी जा सकेगी। इसलिए इस करार की दिशा में आगे बढ़ा जा रहा है।’ उनका मानना है कि यह कदम राज्य के उद्योगों और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद होगा।

हालांकि, इस प्रस्ताव पर दो तरह की राय उभरकर सामने आई है। एक पक्ष का मानना है कि उत्तराखंड के पास पहले से ही पर्याप्त हाइड्रो और सौर ऊर्जा स्रोत उपलब्ध हैं, ऐसे में महंगे मिड टर्म करार से उपभोक्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। आलोचकों का कहना है कि यदि खरीदी गई 15 प्रतिशत बिजली भी उपयोग में नहीं लाई गई तो संभावित लागत और हानि करोड़ों में होगी।

यह भी तर्क दिया जा रहा है कि 500 मेगावाट की बिजली खरीद हर दिन या माह के लिहाज से हमेशा उपयोगी नहीं होती। वर्ष के कई ऐसे महीने होते हैं जब बिजली का उत्पादन और जरूरत लगभग एक समान होते हैं। ऐसे में 500 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली खरीद राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अनावश्यक भार डालने जैसी होगी, खासकर जब पहले से मौजूद स्रोतों से मांग पूरी की जा सकती हो।

इन सभी पहलुओं पर आज नियामक आयोग में विस्तार से चर्चा होगी। यूपीसीएल को यह साबित करना होगा कि यह खरीद वास्तव में राज्य के उपभोक्ताओं के हित में है और यह केवल एक अतिरिक्त बोझ नहीं है। आयोग के निर्णय का इंतजार रहेगा, जो उत्तराखंड की भविष्य की ऊर्जा रणनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा।

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