0

आतंक को मजहबी चोला पहनाने की प्रवृत्ति से कैसे निपटेंगे?

By Nov 26, 2025

आतंकवाद, विशेष रूप से जिहादी आतंक से प्रभावी ढंग से निपटना एक जटिल चुनौती बनी हुई है, जिसका मुख्य कारण आतंकवादियों द्वारा अपने हिंसक कृत्यों को धार्मिक जामा पहनाने की प्रवृत्ति है। यह प्रवृत्ति न केवल उनके कृत्यों को सही ठहराने का आधार प्रदान करती है, बल्कि उन्हें व्यापक समर्थन और संरक्षण जुटाने में भी मदद करती है। दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी हमले के बाद आत्मघाती हमलावर उमर नबी के वीडियो ने एक बार फिर इस मुद्दे को उजागर किया है।

यह देखा गया है कि ऐसे हमलों के बाद, कई बार हमलावरों को ‘भटका हुआ’ या ‘गुमराह’ बताकर मामले को शांत करने का प्रयास किया जाता है। कुछ राजनेता तो उन्हें अपने मजहब का मानने से भी इनकार कर देते हैं। यह सब इसलिए होता है क्योंकि वे अपने वीडियो में अपने कृत्य को ‘इस्लामी कृत्य’ या ‘शहादत’ बताते हैं। यह प्रवृत्ति कोई नई नहीं है; कई आतंकी समूह अपने नामों में ‘इस्लामी’ शब्द का प्रयोग करते हैं, जैसे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा। ये नाम ही उनकी मजहबी प्रेरणा को दर्शाते हैं, जिसका लक्ष्य अक्सर ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसा कुछ होता है।

इस्लामिक स्टेट (आईएस) जैसे संगठन, जो अपनी बर्बरता के लिए कुख्यात हैं, खुद को विशुद्ध रूप से इस्लामी बताते हैं और अपने झंडे पर शहादा अंकित करते हैं। इसके बावजूद, दुनिया भर से हजारों युवक उनके लिए लड़ने सीरिया और इराक पहुंचे। भारत में भी, कश्मीर जैसे क्षेत्रों में, आईएस जैसे संगठनों के प्रति सहानुभूति रखने वालों की संख्या देखी गई है। राजौरी में आईएस के झंडे को जलाने की घटना पर हुए बवाल ने यह स्पष्ट कर दिया कि किस हद तक मजहबी भावनाओं को चोट पहुंचाने का आरोप लगाकर हंगामा खड़ा किया जा सकता है।

यह दोहरा रवैया, जहां एक ओर आतंकी को ‘भटका हुआ’ बताया जाता है और दूसरी ओर उसके जनाजे में हजारों लोग शामिल होते हैं, जिहादी आतंक से लड़ाई को और कठिन बना देता है। यह हास्यास्पद है कि आतंकी हमलों के बाद ‘जिहाद’ की परिभाषा को ‘आंतरिक संघर्ष’ या ‘छोटे संघर्ष’ के रूप में बदलने का प्रयास किया जाता है, और ‘काफिर’ जैसे शब्दों की मनमानी व्याख्या की जाती है।

यह सच है कि ‘आतंकी का कोई मजहब नहीं होता’, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि वे मजहब का ही सहारा लेकर समर्थन और संरक्षण प्राप्त करते हैं। फरीदाबाद आतंकी मॉड्यूल के मामले में, जहां कई डॉक्टर शामिल थे, यह तर्क दिया गया कि वे सरकार की नीतियों से नाराज थे। यह तर्क कमजोर है, क्योंकि यह उनके डॉक्टर बनने या नौकरी पाने में बाधा नहीं डालता था। उनकी आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का मुख्य कारण ‘जिहाद’ के रास्ते पर चलने का जुनून था, जिसे उन्होंने मजहबी समर्थन से जोड़ लिया था। यदि वे अपनी हरकतों को मजहबी कृत्य साबित करने में सक्षम न होते, तो वे इतने लोगों को अपने साथ जोड़ने में सफल नहीं हो पाते। यह स्पष्ट है कि आतंकवाद की जड़ों में मजहबी उन्माद की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

About

Journalist covering latest updates.

अगली खबरें

दिल्ली की जहरीली हवा: स्कूलों पर फैसला लेने के लिए शिक्षा सचिव तलब

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का बढ़ता संकट अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। कोर्ट ने दिल्ली में वायु गुणवत्ता के बिगड़ते हालात के मद्देनजर स्कूलों को बंद करने की मांग...
By Nov 26, 2025

जलवायु परिवर्तन का दूध उत्पादन पर गहरा असर, एक दिन की गर्मी से 10 दिन का नुकसान

बढ़ती जलवायु परिवर्तन की मार अब सीधे तौर पर हमारे खान-पान पर भी पड़ने लगी है। दूध उत्पादन, जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जलवायु परिवर्तन के कारण गंभीर खतरे में है।...
By Nov 26, 2025

दिल्ली की हवा लगातार 13वें दिन ‘बहुत खराब’, आने वाले सप्ताह में भी राहत के आसार कम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा की गुणवत्ता लगातार 13वें दिन 'बहुत खराब' श्रेणी में बनी हुई है। बुधवार को 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 327 दर्ज किया गया। हालांकि, दिनभर खिली धूप...
By Nov 26, 2025

ट्रेनों में हलाल मांस परोसने पर NHRC का रेलवे को नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भारतीय रेलवे को ट्रेनों में केवल ‘हलाल प्रसंस्कृत मांस’ परोसे जाने की प्रथा के संबंध में एक नोटिस जारी किया है। आयोग ने यह कदम एक शिकायत पर उठाया है,...
By Nov 26, 2025

लाल किले कार बम: आतंक के तार फरीदाबाद के डॉक्टरों तक, खाद की दुकानों से आसानी से मिले सामग्री

दिल्ली के लाल किले में 10 नवंबर को हुए कार बम विस्फोट की जांच में एक गंभीर आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि इस नेटवर्क में हरियाणा के फरीदाबाद जिले...
By Nov 26, 2025

दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे पर कार खंभे से टकराई, दिल्ली के युवक की दर्दनाक मौत

दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे पर बुधवार शाम एक दिल दहला देने वाली सड़क दुर्घटना में दिल्ली के एक युवक की जान चली गई। गोहाना के पास गिवाना गांव के निकट यह हादसा तब हुआ जब एक तेज...
By Nov 26, 2025

शेख हसीना प्रत्यर्पण: भारत ने की जांच की पुष्टि, बांग्लादेश की उम्मीदें बढ़ीं

नई दिल्ली: भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने के संबंध में प्राप्त अनुरोध की जांच की पुष्टि की है। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि भारत पड़ोसी देश...
By Nov 26, 2025

दिल्ली को मिलेगा 53 किमी का नया साइकिल ट्रैक, CM ने DDA को दिया 3 साल का लक्ष्य

दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना नदी के किनारे 53 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित साइकिल ट्रैक परियोजना की...
By Nov 26, 2025

साझा करें