0

तिलहर बस स्टैंड बना ‘अवैध पार्किंग’, यात्री हाईवे पर जान जोखिम में डालकर पकड़ते हैं बस

By Dec 5, 2025

जेठ की तपती दोपहरी हो या पूस की सर्द रात, तिलहरवासियों के लिए बस का सफर आसान नहीं रह गया है। नगर के बीच बने बस स्टैंड की बजाय यात्रियों को हाईवे किनारे खड़े रहकर बस का इंतजार करना पड़ता है, चाहे मौसम कैसा भी हो। कहने को तिलहर में एक बस अड्डा मौजूद है, लेकिन वहां बसें रुकती ही नहीं हैं। डेढ़ लाख की आबादी वाले इस शहर में बसें आवागमन का मुख्य साधन हैं, खासकर लखनऊ, बरेली और दिल्ली जैसे शहरों के लिए। ट्रेनों का ठहराव सीमित होने के कारण अधिकांश लोग बसों पर ही निर्भर हैं।

इसके बावजूद, बस चालक बसों को सीधे हाईवे से निकालकर ले जाते हैं। जिस बस अड्डे पर उनका ठहराव होना चाहिए, वह अब वाहनों की अवैध पार्किंग का स्थल बन गया है। शाम के समय यहां असामाजिक तत्वों का भी जमघट लगने लगा है। सूत्रों के अनुसार, इस गंभीर समस्या की ओर न तो अधिकारी ध्यान दे रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधियों को जनता की इस बड़ी परेशानी को दूर करने की चिंता है।

जब नगर के बीच बस अड्डा बनाया गया था, तब इसने शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत दी थी। हालांकि, पिछले दो दशकों में तिलहर की आबादी तेजी से बढ़ी है, निर्माण कार्य बढ़े हैं, और अतिक्रमण व जाम जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हुई हैं। इसी का परिणाम है कि चालकों ने बसों को अड्डे पर लाना बंद कर दिया। पूर्व में यहां विभिन्न रूटों की लगभग 50 से 60 बसें आती-जाती थीं, लेकिन अब स्थिति यह है कि केवल एक ही बस सुबह तिलहर से बदायूं के लिए जाती है और रात में वापस आती है।

समय-समय पर इस मुद्दे को उठाने पर अनुबंधित बसों का ठहराव कराया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद स्थिति फिर जस की तस हो गई। लगभग एक किलोमीटर अंदर आकर बस अड्डे तक जाने और फिर उतना ही वापस हाईवे पर आने के बजाय, चालक सीधे हाईवे से ही सवारियां उठा लेते हैं। इससे लोगों को रात-दिन की परवाह किए बिना बाइपास, फ्लाईओवर चौराहा या भक्सी तिराहा पर बसों का इंतजार करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी बरसात और रात के समय होती है, जब यात्रियों को सिर छिपाने के लिए भी कोई सुरक्षित स्थान नहीं मिलता।

परिवहन निगम की ओर से दो वर्ष पहले तक एक यातायात निरीक्षक यहां तैनात था। अब आउटसोर्सिंग पर एक लिपिक कार्यरत है। उनके अनुसार, कभी-कभार कोई अनुबंधित बस अड्डे पर आ जाए तो बड़ी बात है। सफाई के लिए नियुक्त कर्मचारी को भी भुगतान देकर केवल झाड़ू लगवा दी जाती है। बस अड्डे पर आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पोषाहार लाने वाले ट्रैक्टर-ट्रालियां और पिकअप वाहन खड़े रहते हैं। इसके अलावा, ई-रिक्शा और अन्य छोटे वाहन भी इसे अपनी पार्किंग स्थली बना चुके हैं। शाम ढलते ही यह स्थान असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें