तेजस क्रैश में शहीद विंग कमांडर स्याल को वायुसेना ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
दुबई एयर शो के दौरान तेजस लड़ाकू विमान के दुखद हादसे में शहीद हुए भारतीय वायुसेना के वीर पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल को भारतीय वायुसेना ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। शुक्रवार को एक नेगेटिव-जी टर्न के दौरान विमान नियंत्रण से बाहर होकर नीचे गिर गया और आग के गोले में तब्दील हो गया। इस घटना ने न केवल भारतीय वायुसेना को झकझोर दिया है, बल्कि देश भर में शोक की लहर दौड़ा दी है।
भारतीय वायुसेना ने विंग कमांडर स्याल को ‘एक समर्पित फाइटर पायलट और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी’ के रूप में याद किया, जिन्होंने ‘पूरे साहस और सम्मान के साथ देश की सेवा की’। वायुसेना के बयान के अनुसार, उनका शांत और अनुशासित स्वभाव सभी के लिए सम्मान का पात्र था। उनके अंतिम सम्मान समारोह में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अधिकारी, उनके सहकर्मी और भारतीय दूतावास के प्रतिनिधि भी मौजूद थे, जो उनके प्रति गहरे सम्मान को दर्शाता है।
इस गंभीर दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए भारतीय वायुसेना ने तुरंत एक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दिया है। तेजस विमान का यह प्रदर्शन दुबई एयर शो में होना था, जो दुनिया के सबसे बड़े एविएशन शो में से एक है। यह शो विमानन क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों और क्षमताओं का प्रदर्शन करता है।
यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना तेजस विमान से जुड़ा पिछले दो वर्षों में दूसरा हादसा है। इससे पहले मार्च 2023 में राजस्थान के जैसलमेर में भी एक तेजस विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, हालांकि उस घटना में पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे थे।
तेजस, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित किया गया है, भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण स्वदेशी लड़ाकू विमान है। इस परियोजना की शुरुआत 1984 में हुई थी और पहला विमान 2016 में वायुसेना में शामिल किया गया। वर्तमान में, भारतीय वायुसेना की दो स्क्वॉड्रन, 45 स्क्वॉड्रन और 18 स्क्वॉड्रन, पूरी तरह से तेजस विमानों से लैस हैं। एक स्क्वॉड्रन में आम तौर पर 16 से 18 विमान होते हैं।
तेजस एक मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है जिसे हवा से हवा में मुकाबले और जमीनी लक्ष्यों पर आक्रामक हवाई हमलों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके अलावा, यह टोही और एंटी-शिप ऑपरेशंस जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी कर सकता है। अपनी उन्नत क्षमताओं के साथ, तेजस भविष्य में भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता का एक प्रमुख स्तंभ बनने की ओर अग्रसर है।
