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टाटा ट्रस्ट्स में गुटबाजी पर विराम? वेणु श्रीनिवासन आजीवन ट्रस्टी नियुक्त

By Nov 15, 2025

जमशेदपुर। टाटा समूह की नियंत्रक इकाई टाटा ट्रस्ट्स में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। ट्रस्ट ने मंगलवार को टीवीएस समूह के अध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन को सर्वसम्मति से ‘आजीवन ट्रस्टी’ के रूप में पुन: नियुक्त कर दिया है। यह फैसला श्रीनिवासन का कार्यकाल 23 अक्टूबर को समाप्त होने से ठीक पहले लिया गया, जिसे संगठन के भीतर चल रही गुटबाजी को समाप्त कर एकता का संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। श्रीनिवासन की पुनर्नियुक्ति के साथ ही, सबकी निगाहें अब मेहरी मिस्त्री पर टिक गई हैं, जिनका कार्यकाल 28 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है।

टाटा ट्रस्ट्स इस समय दो मुख्य गुटों में बंटा हुआ है। एक खेमे का नेतृत्व रतन टाटा के निधन के बाद कमान संभालने वाले नोएल टाटा कर रहे हैं, तो दूसरे का नेतृत्व शापूरजी पालोनजी परिवार से जुड़े मेहरी मिस्त्री के हाथों में है। ट्रस्ट की पुरानी परंपरा के अनुसार, किसी भी नए या आजीवन ट्रस्टी की नियुक्ति के लिए सर्वसम्मत मंजूरी अनिवार्य है। सूत्रों के अनुसार, मिस्त्री की आजीवन ट्रस्टी के रूप में पुनर्नियुक्ति के लिए भी सभी ट्रस्टियों की सर्वसम्मत मंजूरी आवश्यक होगी, हालांकि इस पर कुछ मतभेद हैं कि क्या उनका कार्यकाल स्वतः आगे बढ़ जाएगा या इसके लिए औपचारिक मंजूरी लेनी होगी।

इस पृष्ठभूमि में, 17 अक्टूबर, 2024 को हुई एक बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि किसी भी ट्रस्टी का कार्यकाल समाप्त होने पर, उसे बिना किसी समय सीमा के फिर से नियुक्त कर दिया जाएगा। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि कोई ट्रस्टी इस फैसले के खिलाफ वोट करता है, तो उसे प्रतिबद्धता का उल्लंघन माना जाएगा और वह ट्रस्ट में सेवा देने के लिए उपयुक्त नहीं होगा। यह कदम ट्रस्ट के भीतर भविष्य में होने वाले किसी भी मतभेद को रोकने और निर्णयों में एकरूपता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास प्रतीत होता है।

टाटा ट्रस्ट्स, जिसमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट जैसे कई धर्मार्थ ट्रस्ट शामिल हैं, की टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा संस ही टाटा समूह की सभी कंपनियों की मुख्य होल्डिंग कंपनी है। इस वजह से ट्रस्ट के फैसले न केवल उसकी आंतरिक संरचना, बल्कि पूरे समूह के भविष्य और स्थिरता के लिए भी काफी अहमियत रखते हैं। ऐसे में, मिस्त्री की पुनर्नियुक्ति पर होने वाला फैसला टाटा समूह के लिए अगला बड़ा संकेत होगा।

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