Subrahmanya Sashti 2025: जानें नवंबर में कब है सुब्रह्मण्य षष्ठी, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
सुब्रह्मण्य षष्ठी, जिसे स्कंद षष्ठी या मुरुगन षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, भगवान कार्तिकेय को समर्पित एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व मुख्य रूप से ‘मार्गशीर्ष’ महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान स्कंद की पूजा और व्रत करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। दक्षिण भारत में इस पर्व को विशेष रूप से मनाया जाता है, और यह भगवान मुरुगन के भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस वर्ष, सुब्रह्मण्य षष्ठी नवंबर में मनाई जाएगी। सूत्रों के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 25 नवंबर को रात 10 बजकर 56 मिनट पर शुरू होगी और 27 नवंबर देर रात 12 बजकर 1 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार, सुब्रह्मण्य षष्ठी का पर्व 26 नवंबर को मनाया जाएगा।
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर, स्कंद भगवान का ध्यान करना चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजा स्थल को साफ-सुथरा करके, एक चौकी पर भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। भगवान कार्तिकेय के साथ-साथ शिव परिवार की भी पूजा-अर्चना करें। पूजा में कार्तिकेय जी को फूल, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। फल और मिठाई का भोग लगाएं। इस दिन मोरपंख अर्पित करना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि यह भगवान कार्तिकेय को प्रिय है। अंत में, स्कंद भगवान के मंत्रों और आरती का पाठ करें और सभी लोगों में प्रसाद बांटें।
कार्तिकेय गायत्री मंत्र:
ओम तत्पुरुषाय विधमहे: महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कन्दा प्रचोद्यात:
अन्य मंत्र:
ऊं शारवाना-भावाया नमःज्ञानशक्तिधरा स्कंदा वल्लीईकल्याणा सुंदरादेवसेना मनः कांता कार्तिकेया नामोस्तुतेऊं सुब्रहमणयाया नमः
यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह भगवान कार्तिकेय के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, जो भक्तों के जीवन में सकारात्मकता, समृद्धि और खुशहाली लाता है। इस दिन की गई पूजा और व्रत से व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
इस पर्व को मनाने से पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं और समाज में सद्भाव बना रहता है। यह भक्तों को भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे वे अपने जीवन में सफलता और खुशहाली प्राप्त कर सकते हैं।
इसलिए, सुब्रह्मण्य षष्ठी के इस शुभ अवसर पर, भगवान कार्तिकेय की पूजा और आराधना करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को धन्य बनाएं।
