ग्लेशियर झीलों पर सख्त निगरानी: वाडिया संस्थान बना नोडल, उत्तराखंड में आपदा जोखिम का आकलन
वैश्विक तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव के कारण हिमालयी क्षेत्रों में आपदाओं का खतरा बढ़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने राज्य में स्थित ग्लेशियर झीलों की निगरानी को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान (Wadia Institute of Himalayan Geology) सभी संवेदनशील और अतिसंवेदनशील ग्लेशियर झीलों के वैज्ञानिक अध्ययन, जोखिम आकलन और सुरक्षात्मक उपायों की जिम्मेदारी संभालेगा। शासन ने संस्थान को नोडल विभाग नामित कर विशेषज्ञ आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में लगभग 1200 से अधिक ग्लेशियर झीलें चिह्नित की गई हैं, जिनमें से पांच अत्यधिक जोखिम की श्रेणी में हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी 2024 में 13 झीलों को संवेदनशील घोषित किया था। इसके बाद राज्य स्तर पर एक ठोस कार्ययोजना की आवश्यकता महसूस की गई। इससे पहले चमोली की वसुधारा झील और पिथौरागढ़ की कुछ झीलों का अध्ययन प्रस्तावित था, लेकिन कुछ कारणों से स्थगित हो गया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब वाडिया संस्थान को नोडल बनाया गया है।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि वाडिया संस्थान केंद्रीय शोध संस्थानों के सहयोग से ग्लेशियर झीलों का विस्तृत सर्वेक्षण और वैज्ञानिक विश्लेषण करेगा। इसके आधार पर जोखिम न्यूनीकरण की रणनीति तैयार की जाएगी, जिसमें जलस्तर मापन यंत्र, चेतावनी संकेतक और निगरानी प्रणाली की स्थापना शामिल है। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण इस प्रक्रिया में सहयोग और समन्वय करेगा। यह पहल राज्य को संभावित ग्लेशियर झील बाढ़ (GLOF) जैसी आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर ढंग से तैयार करेगी।
