कानपुर में श्रीमद्भागवत कथा: आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी ने बताए संस्कारवान और साहसी बच्चों के महत्व, सच्ची लगन से मिलते हैं भगवान के दर्शन
कानपुर के मोतीझील में बांके बिहारी जी परिवार समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी ने कथावाचन किया। उन्होंने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों को संस्कारवान और साहसी बनाना अत्यंत आवश्यक है। यदि उनमें अच्छे संस्कार हों तो वे गलत रास्तों पर नहीं चलेंगे।
आचार्य ने ध्रुवचरित का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि सच्ची लगन और अटूट विश्वास हो तो भगवान स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देने आते हैं। उन्होंने मां के दर्जे को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि मां की कृपा से परमात्मा की कृपा सदैव बनी रहती है। कथा के दौरान चार प्रकार के भजनों की व्याख्या करते हुए निष्काम भक्ति को सर्वश्रेष्ठ बताया गया।
इस अवसर पर मनु और प्रियव्रत कथा, भगवान के चौबीस अवतार, जड़ भरत, ऋषभदेव महाराज की कथा और विभिन्न नरकों का वर्णन भी किया गया। इस कथा का आयोजन शहर के लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया था।
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