SNMMCH के ICU में सियार की एंट्री: झारखंड हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, मांगी रिपोर्ट
झारखंड के धनबाद स्थित शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) के सर्जिकल इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में एक सियार के घुसने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस गंभीर मामले को झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान में लिया है और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने तत्काल इस मामले की जांच के आदेश देते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव सहित अन्य संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
यह घटना 17 नवंबर की देर रात की है, जब एक सियार चुपके से सर्जिकल आईसीयू में घुस आया। उस समय आईसीयू में सात अति गंभीर मरीज जीवन और मृत्यु से जूझ रहे थे। कुछ तीमारदारों और अस्पताल कर्मियों ने जब शोर मचाया, तब जाकर सियार वहां से निकला और भागा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। भवन प्रमंडल विभाग की एक टीम ने अस्पताल पहुंचकर चारदीवारी का जायजा लिया। टीम ने यह जानने की कोशिश की कि सियार अस्पताल परिसर में कैसे घुसा, इसके प्रवेश द्वार कहां-कहां हैं और किन जगहों पर दीवारें टूटी हुई हैं। प्रारंभिक जांच में अस्पताल के पिछले हिस्से में कई जगहों पर दीवारें टूटी पाई गईं। अब भवन प्रमंडल विभाग की ओर से इस हिस्से में मजबूत चारदीवारी और कल्वर्ट बनाने की योजना है। बीच में स्थित तालाब के ऊपर भी कल्वर्ट बनाने पर विचार किया जा रहा है।
यह भी पता चला है कि अस्पताल परिसर में तमाम बंदिशों के बावजूद हर दिन बाजार लगता है। यहां खाने-पीने की चीजों और अन्य सामानों की दुकानें सजती हैं। शाम होते ही इन ठेलों और खोमचों से काफी मात्रा में जूठन आसपास फेंक दी जाती है। इसी जूठन को खाने के लिए विभिन्न प्रकार के जंगली और आवारा जानवर, जिनमें गाय-भैंस, कुत्ते और अब सियार भी शामिल हैं, अस्पताल परिसर में घूमते रहते हैं। पहले भी कई बार अस्पताल प्रबंधन की ओर से ऐसी दुकानों पर रोक लगाने की कोशिश की गई है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रहती है। इससे पहले, बड़ी संख्या में भैंसें भी अस्पताल परिसर में घुसकर घास चरती हुई पाई गई हैं, जो इमरजेंसी के रास्ते तक में विचरण करती हैं, जिससे मरीजों को आने-जाने में भी परेशानी होती है।
आईसीयू जैसे संवेदनशील स्थान पर बाहरी जानवर का घुसना मरीजों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। यह घटना न केवल अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और वहां भर्ती मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी और मरीजों को सुरक्षित माहौल मिलेगा।
