34 साल बाद बरी हुआ स्मैक तस्करी का आरोपी, NDPS Act उल्लंघन का मामला
34 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद, एक व्यक्ति को तीन ग्राम स्मैक रखने के आरोप से दोषमुक्त कर दिया गया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट इंदू यादव ने आरोपी अनिल यादव को साक्ष्य के अभाव में बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा। अदालत ने यह भी पाया कि पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों का घोर उल्लंघन किया है।
अदालत के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बरामदगी की जानकारी 72 घंटे के अंदर उच्चाधिकारियों को नहीं दी। साथ ही, गिरफ्तारी के समय वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पेशी और तलाशी के लिए लिखित सहमति लेने जैसे महत्वपूर्ण नियमों का पालन नहीं किया गया।
यह मामला सात नवंबर 1992 का है, जब हसनगंज थाने के दरोगा ललितमणि त्रिपाठी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि गश्त के दौरान उन्हें डालीगंज रेलवे-स्टेशन के पास एक व्यक्ति द्वारा अवैध स्मैक बेचने की सूचना मिली थी। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अनिल कुमार उर्फ पप्पू को गिरफ्तार किया था और उसके पास से दस पुड़िया में कुल तीन ग्राम स्मैक बरामद करने का दावा किया था। इस घटना के 34 साल बाद, कानूनी प्रक्रिया ने आखिरकार आरोपी को बरी कर दिया, जो न्याय प्रणाली में लगने वाले लंबे समय को दर्शाता है।
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